‘अर्जुन अवॉर्डी’ पहलवान, करोड़ों फॉलोअर्स और तीखे बयान: जानें कौन हैं सीओ अनुज चौधरी, जिनके लिए खुद सीएम योगी ने की थी पैरवी

आफताब फारुकी

डेस्क: संभल हिंसा मामले में एफआईआर के आदेश के बाद चर्चा में आए क्षेत्राधिकारी (CO) अनुज चौधरी उत्तर प्रदेश पुलिस के सबसे चर्चित और ‘ग्लैमरस’ अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। एक अंतरराष्ट्रीय पहलवान से लेकर खाकी वर्दी तक का उनका सफर जितना रोमांचक रहा है, उतना ही विवादों से भरा भी।

खेल के मैदान से खाकी तक का सफर: मूल रूप से मुजफ्फरनगर के रहने वाले अनुज चौधरी साल 2012 में उत्तर प्रदेश पुलिस में खेल कोटे से पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर भर्ती हुए थे।

  • उपलब्धियां: अनुज चौधरी कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर चुके हैं और एक पूर्व ओलंपियन हैं।
  • सम्मान: खेल जगत में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ से नवाजा जा चुका है।

सोशल मीडिया के ‘सुपरकॉप’: अनुज चौधरी की लोकप्रियता का अंदाजा उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स से लगाया जा सकता है।

  • फेसबुक: 1.3 मिलियन (13 लाख) फॉलोअर्स।
  • इंस्टाग्राम: 8.85 लाख फॉलोअर्स। वे अपनी वर्दी में अक्सर ‘रील्स’ साझा करते हैं, जिन्हें युवाओं के बीच काफी पसंद किया जाता है।

बयान जो बने सुर्खियों की वजह: अनुज चौधरी अपने बेबाक और कभी-कभी ‘विवादास्पद’ बयानों के लिए जाने जाते हैं।

  1. होली बनाम जुमा: पिछले साल जब होली और जुमा एक ही दिन पड़े, तो उन्होंने कहा था— “होली साल में एक बार आती है और जुमा 52 बार। जिसे रंग से डर लगता है, वो घर से न निकले।”
  2. सेवइयां और गुझिया: ईद के दौरान उन्होंने कहा था— “सेवइयां खिलानी है तो गुझिया भी खानी पड़ेगी, भाईचारा एकतरफा नहीं होता।”
  3. आजम खान से टकराव: रामपुर में तैनाती के दौरान जब सपा नेता आजम खान ने उन्हें अखिलेश यादव का ‘एहसान’ याद दिलाया, तो अनुज चौधरी ने दो टूक जवाब दिया था— “मुझे अर्जुन अवॉर्ड मिला है, जो किसी के एहसान से नहीं मिलता।”

जब सीएम योगी ने किया बचाव: विपक्षी दलों (सपा और कांग्रेस) ने जब उनके बयानों को ‘सांप्रदायिक’ बताकर आलोचना की, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका बचाव किया था। सीएम ने एक साक्षात्कार में कहा था— “वह पहलवान रहा है, अर्जुन पुरस्कार विजेता है। अब पहलवान की तरह बोलेगा तो कुछ लोगों को बुरा लगेगा, लेकिन वह सच बोल रहा है।”

धार्मिक कार्यों में सक्रियता: संभल में 46 साल बाद जब एक प्राचीन शिव मंदिर खोला गया, तब अनुज चौधरी खुद शिवलिंग की सफाई करते हुए देखे गए थे। प्रशासन के भीतर उन्हें एक ‘सख्त और धार्मिक’ छवि वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता है।

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