असम में ‘वोटर लिस्ट’ पर महाभारत: BJP पर 60 सीटों से विपक्षी मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप; 5 दलों ने दर्ज कराई FIR, चुनाव आयोग तक पहुँचा मामला

तारिक खान
गुवाहाटी: असम में मई में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पारा चरम पर है। राज्य की पांच प्रमुख विपक्षी पार्टियों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर हेरफेर करने की ‘असंवैधानिक साजिश’ रचने का आरोप लगाया है। कांग्रेस, रायजोर दल, और वामपंथी दलों सहित विपक्ष ने गुवाहाटी के दिसपुर थाने में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।

‘मिशन 10,000 वोट’: क्या है पूरा मामला? विपक्षी दलों, विशेषकर रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई का आरोप है कि भाजपा ने एक गुप्त ‘डिजिटल मिशन’ शुरू किया है।
- आरोप: 4 जनवरी को हुई एक वर्चुअल बैठक में दिलीप सैकिया ने पार्टी विधायकों को निर्देश दिया कि वे 126 में से कम से कम 60 सीटों पर 10,000-10,000 विपक्षी समर्थकों के नाम वोटर लिस्ट से हटवाएं।
- साक्ष्य: विपक्ष ने मांग की है कि इस बैठक के वीडियो फुटेज और डिजिटल लॉग को साक्ष्य के तौर पर जब्त किया जाए।
चुनाव आयोग से प्रक्रिया रोकने की मांग: विधायक अखिल गोगोई ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर मांग की है कि पिछले तीन महीनों में दाखिल किए गए सभी फॉर्म-7 (नाम हटाने के लिए आपत्ति) का गहन ऑडिट कराया जाए। उन्होंने जांच पूरी होने तक मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर रोक लगाने की भी अपील की है।
भाजपा का पलटवार: “यह मिया तुष्टिकरण की राजनीति” इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक,भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की हताशा बताया है।
- भाजपा प्रवक्ता जयंत कुमार गोस्वामी ने कहा कि अखिल गोगोई उरियामघाट इलाके से बेदखल किए गए 11,000 अवैध कब्जाधारियों के नाम हटने से बचाने के लिए यह ‘बदनाम करने का अभियान’ चला रहे हैं। उन्होंने इसे विपक्षी दलों की ‘आदिवासी-विरोधी’ मानसिकता करार दिया।
- दिलीप सैकिया ने कहा— “वोटर लिस्ट को शुद्ध करना निर्वाचन आयोग और जनता की जिम्मेदारी है। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि मृत लोगों और स्थान बदल चुके लोगों के नाम सूची से हटें। विपक्ष में इतनी सामान्य समझ भी नहीं है कि नाम जोड़ने-हटाने का काम आयोग करता है, पार्टी नहीं।”
चुनाव की टाइमलाइन: असम में 27 दिसंबर 2025 को मसौदा मतदाता सूची जारी की गई थी। अब 10 फरवरी 2026 को अंतिम सूची का प्रकाशन होना है। विपक्ष को डर है कि इस एक महीने के अंतराल में उनके समर्थकों के नाम काट दिए जाएंगे।











