“ऊपर से प्रेशर है, स्कूल तोड़ना पड़ेगा!”: बैतूल में ग्रामीणों की गुहार अनसुनी; कलेक्टर से मिलने पहुंचे लोग, पीछे से प्रशासन ने ढहा दिया अब्दुल नईम का स्कूल

संजयं ठाकुर 

डेस्क: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से मानवता और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाली एक खबर सामने आई है। जहाँ एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं भैंसदेही तहसील के ढाबा गांव में बच्चों के भविष्य की नींव (स्कूल भवन) को प्रशासन ने कथित ‘ऊपर के दबाव’ में जमींदोज कर दिया।

अफवाह ने बदला मंजर: ढाबा गांव के निवासी अब्दुल नईम ने लगभग ₹20 लाख की लागत से एक स्कूल भवन तैयार कराया था। गांव में करीब 2000 की आबादी है, जिसमें महज 4 मुस्लिम परिवार हैं। गांव से सबसे नजदीकी स्कूल 5 किमी दूर है, जिसे देखते हुए नईम ने नर्सरी से 8वीं तक का स्कूल शुरू करने की योजना बनाई थी। 30 दिसंबर को शिक्षा विभाग में अनुमति के लिए आवेदन भी किया गया। लेकिन, अचानक एक अफवाह फैलाई गई कि यहाँ “अवैध मदरसा” बनवाया जा रहा है।

नईम ने बताया कि “कुछ लोगों ने अफवाह फैलाई कि मैं यहां पर मदरसे का संचालन करने वाला हूं जबकि गांव में मात्र 3 मुस्लिम परिवार हैं. ऐसे में मदरसा कैसे संचालित हो सकता है. मैं स्कूल खोलने के लिए अपने खर्चे से बिल्डिंग तैयार कर रहा था. इसके बाद भी अगर मेरे से कोई गलती हुई है और नियम विरुद्ध निर्माण किया गया है तो शासन के नियम अनुसार जुर्माना देने को तैयार हूं.”

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क्लीन चिट और NOC के बावजूद ‘बुल्डोजर’ नीति: ग्रामीणों के अनुसार, एसडीएम और तहसीलदार ने जांच में सब सही पाया और पंचायत से NOC लेने को कहा। लेकिन अगले ही दिन पंचायत ने भवन गिराने का नोटिस थमा दिया। ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद पंचायत ने NOC तो जारी कर दी, लेकिन सोमवार शाम को एसडीएम ने कथित तौर पर नईम से कहा— “ऊपर से बहुत प्रेशर है, स्कूल तोड़ना पड़ेगा।”

कलेक्टर के दरवाजे पर जनता, पीछे से चला हथौड़ा: आज (मंगलवार) सुबह जब सैकड़ों ग्रामीण अब्दुल नईम के साथ अपनी बात रखने के लिए 80 किमी दूर बैतूल कलेक्टर कार्यालय (जनता दरबार) पहुँचे, तो पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। घंटों बाद जब वे कलेक्टर के सामने अपनी गुहार लगाने में सफल हुए, तो कलेक्टर ने मामले की “जांच” का आश्वासन दिया। लेकिन विडंबना देखिए, जिस समय ग्रामीण कलेक्टर से न्याय की उम्मीद कर रहे थे, ठीक उसी समय एसडीएम कथित रूप से मौके पर स्कूल भवन के कुछ हिस्सों को ढहा रहे थे।

जय आदिवासी युवा शक्ति संगठन ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर मांग की है कि नईम अपनी निजी जमीन पर स्कूल खोलने के लिए बिल्डिंग बना रहा था, उसे मालूम नहीं था कि डायवर्टेड जमीन पर भी बिल्डिंग बनाने के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। जब इसकी जानकारी लगी तो उसने ग्राम पंचायत में आवेदन किया था लेकिन ग्राम पंचायत के द्वारा अनुमति तहसील या एसडीम ऑफिस से लेने के लिए जानकारी दी गई थी। जिसके लिए उन्होंने आवेदन कर दिया था कि बिना जानकारी बिल्डिंग निर्माण किया गया था, जो भी जुर्माना उस पर लगता है वह देने को तैयार है लेकिन इसके बाद भी अतिक्रमण के नाम पर कार्रवाई की गई। ऐसे में इस पर रोक लगनी चाहिए।

ग्रामीणों का आक्रोश: गांव वालों का कहना है कि यदि भवन में कोई तकनीकी कमी थी, तो जुर्माना लिया जा सकता था। लेकिन शिक्षा के मंदिर को तोड़ना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अब ढाबा गांव के बच्चों को शिक्षा के लिए फिर से मीलों दूर जाना पड़ेगा।

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