TCS में ‘ग्रेट लेऑफ़’: 6 महीने में 30,000 कर्मचारियों की विदाई; क्या 2026 में और गिरेगी गाज?

मो0 सलीम
डेस्क: भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) से जुड़ी एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के नतीजों के साथ कंपनी ने पुष्टि की है कि पिछले 6 महीनों में उसके कुल कर्मचारियों की संख्या में लगभग 30,000 की कमी आई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और आंतरिक रिस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) के चलते कंपनी अपने वर्कफोर्स में बड़े बदलाव कर रही है।

- तीसरी तिमाही (Oct-Dec 2025): 11,151 कर्मचारियों की कमी।
- दूसरी तिमाही (July-Sept 2025): 19,755 कर्मचारियों की कमी।
- कुल कमी: पिछले दो तिमाहियों में लगभग 30,906 कर्मचारी कम हुए हैं।
क्या यह सिर्फ छंटनी है? TCS के CHRO सुदीप कुन्नुमल के अनुसार, तीसरी तिमाही में आधिकारिक तौर पर केवल 1,800 कर्मचारियों को ही ‘टर्मिनेट’ (निकाला) गया है। बाकी की संख्या उन कर्मचारियों की है जो खुद कंपनी छोड़कर गए (Attrition) और कंपनी ने उनकी जगह नई भर्तियां नहीं कीं। इसे तकनीकी भाषा में ‘नेट हेडकाउंट रिडक्शन’ कहा जाता है।
छंटनी के पीछे के 3 बड़े कारण:
- AI और ऑटोमेशन का दबाव: कंपनी क्लाउड और AI टूल्स के आने के बाद अपनी कार्यप्रणाली बदल रही है। कई पारंपरिक भूमिकाएं अब मशीनों या एआई द्वारा निभाई जा रही हैं।
- परफॉर्मेंस और कॉस्ट कटिंग: ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, टेक कंपनियां कम प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बाहर कर अपनी लागत (Cost) कम करने पर ध्यान दे रही हैं।
- ऑफिस आने की अनिवार्यता (WFO): TCS ने वर्क-फ्रॉम-ऑफिस नियमों को अत्यंत सख्त कर दिया है। चेतावनी दी गई है कि जो कर्मचारी ऑफिस अटेंडेंस का पालन नहीं करेंगे, उन्हें 2026 के परफॉर्मेंस रेटिंग साइकिल से बाहर कर दिया जाएगा।
भविष्य की चेतावनी: TCS ने संकेत दिया है कि रिस्ट्रक्चरिंग की यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। 2026 में भी जरूरत पड़ने पर और छंटनी की जा सकती है। हालांकि, कंपनी का दावा है कि प्रत्येक टर्मिनेशन एक तय आंतरिक प्रक्रिया के तहत “ठोस कारणों” के साथ किया जाएगा।











