दिल्ली दंगा मामला: 5 साल बाद जेल से बाहर आए गुलफ़िशा फ़ातिमा और मीरान हैदर; भावुक हुए परिजन, माला पहनाकर किया स्वागत

तारिक खान
नई दिल्ली: दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साज़िश (UAPA) के मामले में करीब 5 साल से जेल में बंद चार अभियुक्त बुधवार रात जेल से बाहर आ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा सोमवार को दी गई ज़मानत के बाद कड़कड़डूमा कोर्ट की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होते ही इन आरोपियों की रिहाई मुमकिन हो सकी।

- गुलफ़िशा, मीरान और शिफ़ा उर रहमान को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया।
- मोहम्मद सलीम ख़ान मंडोली जेल से बाहर आए।
स्वागत में बंटी मिठाइयां: गुलफ़िशा फ़ातिमा जब तिहाड़ जेल के गेट से बाहर निकलीं, तो उनके रिश्तेदारों और समर्थकों ने फूलों की मालाओं और मिठाइयों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। 5 साल के लंबे इंतज़ार के बाद अपनों को देख परिजनों की आँखें नम हो गईं।
“संविधान पर भरोसा था और रहेगा”: जेल से बाहर आते ही शिफ़ा उर रहमान ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए न्यायपालिका के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा:
“मैं अदालत का शुक्रगुज़ार हूं। मुझे भारत के संविधान और क़ानून पर पूरा भरोसा था और रहेगा। इसी क़ानून के तहत आज हम न्याय पाकर बाहर आए हैं।”
क़ानूनी प्रक्रिया और ज़मानत की शर्तें: एडिशनल सेशन्स जज समीर बाजपेयी ने चारों अभियुक्तों की ओर से दाख़िल किए गए 2-2 लाख रुपये के ज़मानती बॉन्ड और उतनी ही राशि के स्थानीय ज़मानतदारों को स्वीकार किया। हालांकि, पांचवें अभियुक्त शादाब अहमद बुधवार को बॉन्ड जमा नहीं करा सके, जिसके कारण उनकी रिहाई एक दिन के लिए टल गई है।
उमर ख़ालिद और शरजील इमाम को राहत नहीं: उल्लेखनीय है कि इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर ख़ालिद और शरजील इमाम की भूमिका को ‘केंद्रीय’ और ‘अलग’ बताते हुए उनकी ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी। जबकि इन पांचों को ‘स्थानीय स्तर’ पर शामिल होने के आधार पर राहत दी गई है।










