महाराष्ट्र की राजनीति में ‘भूकंप’: अंबरनाथ में BJP के साथ हाथ मिलाने वाले 12 कांग्रेसी पार्षद अब बीजेपी में शामिल; एकनाथ शिंदे को लगा बड़ा झटका

आदिल अहमद
मुंबई/ठाणे: महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर ‘असंभव’ लगने वाले समीकरण हकीकत बनते दिख रहे हैं। अंबरनाथ नगरपालिका परिषद के मेयर चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच हुए ‘गुप्त’ गठबंधन ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस से निलंबित किए गए सभी 12 पार्षदों ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर बीजेपी का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने महायुति (बीजेपी-शिंदे-अजित पवार) और महाविकास अघाड़ी (MVA) दोनों के भीतर हलचल पैदा कर दी है।

- इस गठबंधन की मदद से बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल मेयर चुनी गईं।
- एकनाथ शिंदे के गढ़ और उनके बेटे श्रीकांत शिंदे के निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना की 25 साल पुरानी सत्ता छिन गई।
कांग्रेस की सख्त कार्रवाई: जैसे ही बीजेपी-कांग्रेस के इस स्थानीय गठबंधन की खबर फैली, कांग्रेस आलाकमान ने इसे ‘अनैतिक’ करार दिया। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अंबरनाथ ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल और सभी 12 पार्षदों को निलंबित कर दिया।
सचिन सावंत की कानूनी चेतावनी: कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने इस दलबदल को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने ‘एक्स’ (X) पर लिखा:
“कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर जीतकर बीजेपी में शामिल होना अवैध है। यह न केवल अनैतिक है बल्कि असंवैधानिक भी है। हम इन पार्षदों की सदस्यता रद्द कराने के लिए कानूनी नोटिस भेज रहे हैं और कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।”
मुख्यमंत्री फडणवीस की नाराजगी: दिलचस्प बात यह है कि इस गठबंधन से बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी खुश नहीं थे। उन्होंने स्थानीय नेताओं को फटकार लगाते हुए कहा था कि कांग्रेस या AIMIM के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं है और इसे तत्काल भंग किया जाना चाहिए।
समीकरणों का भविष्य: निलंबित पार्षदों का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए यह फैसला लिया और पार्टी ने उनकी बात सुने बिना ही उन्हें निकाल दिया। अब बीजेपी में शामिल होने के बाद, इन पार्षदों पर दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत तलवार लटक सकती है।











