गाजियाबाद: ‘नागरिकता जांचने वाली मशीन’ का दावा करने वाले SHO पर एक्शन; DCP ने जारी की चेतावनी, जांच के आदेश

तारिक खान
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में झुग्गी बस्ती के लोगों को ‘मशीन’ के जरिए बांग्लादेशी बताने वाले कौशांबी थाना प्रभारी (SHO) अजय कुमार शर्मा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और भारी फजीहत के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। ट्रांस-हिंडन के DCP पाटिल निमिश दशरथ ने SHO को कड़ी चेतावनी जारी करते हुए उनके व्यवहार की जांच शुरू कर दी है।

SHO की दलील: “यह तो साइकोलॉजिकल ट्रिक थी” जब इस मामले पर विवाद बढ़ा, तो SHO अजय कुमार शर्मा ने अपनी सफाई पेश की। उन्होंने स्वीकार किया कि वह लोगों पर एक ‘साइकोलॉजिकल ट्रिक‘ (मनोवैज्ञानिक चाल) का इस्तेमाल कर रहे थे। शर्मा ने कहा:
“पिछले साल हमने इसी झुग्गी बस्ती से 5 बांग्लादेशियों को पकड़ा था। हिरासत में पूछताछ के दौरान हम अक्सर इस तरह की चाल चलते हैं ताकि संदिग्ध सच उगल दे। मुझे लगा कि यह तरीका यहाँ भी काम करेगा।”
क्या था पूरा मामला? 23 दिसंबर को पुलिस की टीम कौशांबी के भोवापुर स्लम और बिहारी मार्केट में चेकिंग कर रही थी। वीडियो में दिख रहा है कि SHO एक बुजुर्ग से आईडी कार्ड मांगते हैं। बुजुर्ग ने बताया कि वह बिहार के अररिया का रहने वाला है। तभी SHO ने अपनी जेब से एक कार्ड जैसी चीज़ निकाली और बुजुर्ग की पीठ पर लगाकर दावा किया कि, “मशीन तो बता रही है कि तुम बांग्लादेशी हो।”
सोशल मीडिया पर लोगों ने इस वीडियो के बाद पुलिस की जमकर ‘मौज’ ली। यूजर्स ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अब विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि मोबाइल या कार्ड पीठ पर स्पर्श करते ही ‘नागरिकता’ का डेटाबेस खंगाल लेता है?










