इंदौर जल त्रासदी: ‘पीने के पानी में मिला था नाले का पानी’— मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकारी लापरवाही, मौत का आंकड़ा बढ़कर 8 हुआ

आफ़ताब फारुकी

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा इलाके में हुए भीषण जल संकट पर सरकार ने आखिरकार बड़ी लापरवाही की बात स्वीकार कर ली है। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बुधवार को स्पष्ट किया कि जांच में पीने के पानी की पाइपलाइन में नाले (सीवरेज) का गंदा पानी मिला हुआ पाया गया है। इसी दूषित पानी के कारण इलाके में मौतों और बीमारी का तांडव मचा।

मंत्री ने की 8 मौतों की पुष्टि: इससे पहले मौतों के आंकड़ों को लेकर बने संशय को खत्म करते हुए मंत्री विजयवर्गीय ने आधिकारिक तौर पर बताया कि इस दुखद घटना में अब तक 8 लोगों की जान जा चुकी है। गौरतलब है कि इससे पहले सरकारी आंकड़ों में मौतों की संख्या कम बताई जा रही थी, लेकिन स्थानीय दौरे के बाद मंत्री ने वास्तविकता स्वीकार की।

जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा:

“जैसी संभावना जताई जा रही थी, जांच में वही सामने आया है। पानी में नाले का पानी मिला हुआ है और वह पूरी तरह दूषित है। पानी का ट्रीटमेंट पहले से ही शुरू कर दिया गया था और वर्तमान में भी शुद्धिकरण की प्रक्रिया जारी है।”

10 दिनों तक चलेगा चेकिंग अभियान: प्रशासन अब पूरे भागीरथपुरा इलाके में पाइपलाइन और ड्रेनेज सिस्टम की बारीकी से जांच करेगा। विजयवर्गीय ने बताया कि पूरी कॉलोनी के जल वितरण नेटवर्क को चेक करने में कम से कम 8 से 10 दिन का समय लगेगा। जब तक पानी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है।

अस्पतालों में अब भी भर्ती हैं सैकड़ों लोग: मंगलवार को मामला सामने आने के बाद से अब तक सैकड़ों लोग बीमार हैं। दूषित पानी के कारण उल्टी, दस्त और संक्रमण की समस्या से जूझ रहे मरीजों का इलाज शहर के विभिन्न अस्पतालों में जारी है। प्रशासन की इस देरी से जागने वाली कार्यप्रणाली को लेकर जनता में अब भी भारी रोष है।

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