‘पहले अपने मुख्यमंत्रियों को कंट्रोल करें मोहन भागवत’— आरएसएस प्रमुख की एकता वाली अपील पर कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद का कड़ा पलटवार

शफी उस्मानी

नई दिल्ली/रायपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत द्वारा रायपुर में दिए गए ‘एकता और सामूहिक शक्ति’ के संदेश पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने भागवत के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया है कि एक तरफ संघ प्रमुख एकता की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ उनकी ही विचारधारा से निकले मुख्यमंत्री और नेता समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।

शमा मोहम्मद का तीखा हमला: कांग्रेस नेता ने कहा कि वह मोहन भागवत की एकता और सामूहिक शक्ति की बात से सहमत हैं, लेकिन हकीकत इसके उलट है। उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा:

“परेशानी यह है कि उनके (भागवत) अपने ही मुख्यमंत्री उनकी बात का पालन नहीं करते। सीएम योगी आदित्यनाथ रोजाना मुसलमानों के खिलाफ बयानबाजी करते हैं, गिरिराज सिंह और हिमंता बिस्वा शर्मा गाली देते हैं। अगर आरएसएस ही बीजेपी है, तो मोहन भागवत अपने इन नेताओं को कंट्रोल क्यों नहीं कर रहे?”

उन्होंने आगे कहा कि विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ता ईसाइयों पर हमले करते हैं, जबकि वीएचपी भी आरएसएस का ही हिस्सा है। भागवत को सबसे पहले अपने संगठन के लोगों को समझाना चाहिए।

मोहन भागवत ने रायपुर में क्या कहा था? बुधवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने समाज से एकजुट रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत सभी का है और सच्ची एकता तब आएगी जब भेदभाव खत्म होगा। भागवत ने विशेष रूप से जोर दिया था कि:

  • लोगों को धर्म, पैसा, भाषा या क्षेत्र के आधार पर एक-दूसरे से भेदभाव नहीं करना चाहिए।
  • उन्होंने हाल ही में देहरादून में हुई त्रिपुरा के छात्र एंजल चकमा की हत्या का जिक्र करते हुए इसे दुखद बताया और सामूहिक शक्ति के महत्व पर जोर दिया।

साझा शक्ति बनाम आंतरिक कलह: विपक्ष का आरोप है कि आरएसएस प्रमुख के शांतिपूर्ण बयानों और बीजेपी नेताओं के चुनावी बयानों में भारी विरोधाभास है। कांग्रेस का तर्क है कि जब तक बीजेपी और उसके सहयोगी संगठनों के जमीनी कार्यकर्ता और बड़े नेता इस ‘एकता के मंत्र’ को नहीं अपनाते, तब तक ऐसे बयानों का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

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