JNU में ‘नारेबाज़ी’ पर घमासान: PM और गृह मंत्री के खिलाफ कथित विवादित नारों पर प्रशासन सख्त; ABVP ने बताया ‘कब्र खोदने की साजिश’, मनोज झा ने उठाए सवाल

निलोफर बानो
नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर वैचारिक जंग का मैदान बन गया है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद कैंपस में देर रात छात्रों के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन किया। आरोप है कि इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए।

छात्र संघ और ABVP के बीच वार-पलटवार:
- JNUSU की सफाई: अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने कहा कि छात्र हर साल 5 जनवरी को 2020 की कैंपस हिंसा की निंदा करने के लिए जुटते हैं। उन्होंने नारों का बचाव करते हुए कहा कि ये नारे ‘वैचारिक’ थे और किसी पर व्यक्तिगत हमला नहीं थे।
- ABVP का आरोप: एबीवीपी के जेएनयू यूनिट उपाध्यक्ष मनीष चौधरी ने कहा कि कैंपस में “एबीवीपी और आरएसएस की कब्र खुदेगी” जैसे नारे लगाना अब आम बात हो गई है। उन्होंने सवाल किया कि क्या ये लोग देश के 60 लाख एबीवीपी सदस्यों को निशाना बना रहे हैं?
क्या है राजनीतिक प्रतिक्रिया? इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है:
- मनोज झा (RJD): उन्होंने ‘मुर्दाबाद’ के नारों को लोकतंत्र के खिलाफ बताया, लेकिन साथ ही सवाल उठाया कि “आखिर कितने साल तक कोई बिना ट्रायल के जेल में रहे?” उन्होंने चयनात्मक गुस्से (Selective Outrage) पर भी सवाल खड़े किए।
- आशीष सूद (दिल्ली सरकार): उन्होंने घटना की निंदा करते हुए विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे देश तोड़ने की बात करने वाले शरजील इमाम और उमर खालिद जैसे लोगों के प्रति सहानुभूति दिखा रहे हैं।
- केसी त्यागी (JDU): उन्होंने स्पष्ट कहा कि जमानत न मिलना न्यायपालिका का फैसला है, इसमें प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को घसीटना अनुचित है।
कानूनी शिकंजा: सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल ने भी दिल्ली पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के खिलाफ ‘भड़काऊ और उकसाने वाली’ हरकत बताया है। पुलिस फिलहाल वीडियो की जांच कर रही है और जेएनयू प्रशासन के पत्र पर कानूनी राय ले रही है।










