‘नंबर 1’ इंदौर में मौत का पानी: भागीरथपुरा में 17 की जान गई; पुलिस चौकी के टॉयलेट की गंदगी पाइपलाइन में मिलने से मची त्रासदी

तारिक आज़मी
इंदौर: लगातार आठ बार से देश का सबसे स्वच्छ शहर होने का गौरव हासिल करने वाला इंदौर आज एक बड़ी मानवीय त्रासदी से जूझ रहा है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने वाले इस शहर की जलापूर्ति प्रणाली की पोल इस घटना ने खोल दी है।

- मौतें: 17 लोग (अब तक)।
- अस्पताल में भर्ती: करीब 400 लोग भर्ती हुए, जिनमें से 150 अब भी उपचाराधीन हैं।
- प्रभावित: सबसे ज्यादा मार बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ी है।
स्वच्छता की रैंकिंग और कड़वी हकीकत: इंदौर ने सड़कों की रात में सफाई और कचरा प्रबंधन में दुनिया भर में मिसाल पेश की, लेकिन विशेषज्ञ अब इसकी रैंकिंग प्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व नेशनल नोडल अधिकारी (पेयजल सुरक्षा) सुधींद्र मोहन शर्मा ने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा:
“इंदौर की सफाई सिर्फ बाहर से दिखती है। ‘क्लीनेस्ट सिटी’ की रैंकिंग में साफ पानी का हिस्सा मात्र 7 से 8 फीसदी है। वॉटर क्वालिटी सर्विलांस पर ध्यान ही नहीं दिया गया। नियमानुसार पूरे इंदौर को कवर करने के लिए महीने में कम से कम 300 सैंपल्स की जांच होनी चाहिए, जो नहीं हो रही।”
इलाज के लिए दर-दर भटके लोग: त्रासदी की शिकार 6 महीने की गर्भवती प्रियांशी के पति अभिनव बागोरिया की आपबीती सरकारी तंत्र की विफलता को उजागर करती है। उन्होंने बताया कि गंभीर हालत के बावजूद तीन अस्पतालों ने उन्हें चक्कर लगवाए। निजी अस्पतालों का भारी खर्च और सरकारी अस्पतालों की कागजी औपचारिकता ने पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ा दीं।

प्रशासनिक कार्रवाई: कलेक्टर ने बताया कि संबंधित जोनल अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है और एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की गई है। फिलहाल पूरे इलाके में टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है।












