मधुबनी में नफरत का नंगा नाच: सुपौल के मजदूर को ‘बांग्लादेशी’ बताकर बेरहमी से पीटा; ‘जय भवानी’ बोलने का दबाव, हत्या के प्रयास की FIR दर्ज

ईदुल अमीन
मधुबनी (बिहार): पड़ोसी देश बांग्लादेश में जारी हिंसा की तपिश अब भारतीय सीमाओं के भीतर निर्दोषों को झुलसाने लगी है। बिहार के मधुबनी जिले के राजनगर थाना क्षेत्र में एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक भारतीय मुस्लिम मजदूर को ‘बांग्लादेशी’ होने के शक में भीड़ ने जानलेवा तरीके से पीटा। पीड़ित की पहचान सुपौल जिले के रहने वाले नूरशेद आलम के रूप में हुई है, जो मधुबनी में नाला निर्माण के काम के सिलसिले में आए थे।

- पहला वीडियो: नीले स्वेटर में खून से लथपथ नूरशेद को भीड़ ने घेर रखा है। लोग गाली-गलौज कर रहे हैं और उनके मोबाइल में पाकिस्तानी नंबर होने का झूठा दावा कर रहे हैं।
- दूसरा वीडियो: एक हमलावर नूरशेद के ऊपर चढ़कर उसके चेहरे पर मोबाइल से लगातार वार कर रहा है। हमलावर चिल्ला रहा है— “तुम लोग गाय काटते हो… जय भवानी क्यों नहीं कहा?” नूरशेद हाथ जोड़कर जान की भीख मांगते हुए कह रहे हैं— “हम कमाते-खाते हैं, जो कहोगे वो कहूंगा।”
पुलिस का एक्शन: “वह बांग्लादेशी नहीं, हिंदुस्तानी है” घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मधुबनी पुलिस ने स्पष्ट किया कि पीड़ित व्यक्ति बांग्लादेशी नहीं बल्कि बिहार के सुपौल जिले का रहने वाला है।
- मधुबनी एसपी योगेंद्र कुमार ने बताया कि राजनगर थाने में BNS की धारा 109 (हत्या के प्रयास) और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
- आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक विशेष टीम (SIT) का गठन किया गया है और छापेमारी जारी है।
इलाज के लिए नेपाल ले जाना पड़ा पीड़ित के चचेरे भाई नसीम ने बताया कि नूरशेद की दाढ़ी लंबी होने के कारण उन्हें सॉफ्ट टारगेट बनाया गया। मधुबनी और पूर्णिया में प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें विराटनगर (नेपाल) ले जाया गया है। अब तक इलाज में 25 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं, जिससे गरीब परिवार की आर्थिक कमर टूट गई है। परिवार का सवाल है कि इस बेगुनाह पर हुए हमले और आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश यह घटना 30 दिसंबर 2025 की दोपहर चकदह गाँव के पास हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमलावरों ने नफरती नारे लगाते हुए नूरशेद को पाकिस्तान और बांग्लादेश से जोड़ने की कोशिश की। पीड़ित के परिजनों का कहना है कि हमलावरों से उनकी कोई पुरानी दुश्मनी नहीं थी, उन्हें सिर्फ मजहबी पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया।











