दिल्ली में टीएमसी सांसदों को पुलिस ने सड़कों पर घसीटा: ममता बनर्जी का अमित शाह पर तीखा हमला— “लोकतंत्र बीजेपी की जागीर नहीं, यह वर्दी का घमंड है”

आदिल अहमद
नई दिल्ली/कोलकाता: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार को राजनीतिक पारा उस वक्त चढ़ गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय के बाहर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन और महुआ मोइत्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। सांसदों के साथ हुए इस व्यवहार पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “लोकतंत्र का अपमान” करार दिया है।

“चुने हुए प्रतिनिधियों को सड़कों पर घसीटना कानून लागू करना नहीं, बल्कि वर्दी का घमंड है। लोकतंत्र सत्ता में बैठे लोगों की सुविधा से नहीं चलता। यह लोकतंत्र है, बीजेपी की प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं। कोई भी गृह मंत्री यह तय नहीं कर सकता कि लोकतंत्र में सम्मान का हकदार कौन है।”
क्यों भड़का टीएमसी का गुस्सा? इस पूरे विवाद की जड़ कोलकाता में हुई प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई है। गुरुवार को टीएमसी की राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC के प्रमुख प्रतीक जैन के घर पर ईडी ने छापेमारी की। छापेमारी के दौरान खुद ममता बनर्जी प्रतीक जैन के घर पहुँच गईं। टीएमसी का आरोप है कि केंद्र सरकार ईडी के ज़रिए पार्टी के “रणनीतिक और राजनीतिक दस्तावेज़” छीनने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: कोलकाता में छापे के विरोध में टीएमसी सांसद दिल्ली में अमित शाह के दफ्तर के बाहर जमा हुए और नारेबाजी शुरू कर दी। ममता बनर्जी ने बीजेपी के ‘दोहरे मापदंड’ पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बीजेपी नेता विरोध करते हैं तो उन्हें ‘रेड कार्पेट’ मिलता है, लेकिन विपक्षी सांसदों को अपमानित और प्रताड़ित किया जाता है।
I-PAC और आगामी चुनाव: राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले I-PAC पर ईडी की यह कार्रवाई टीएमसी के लिए बड़ा झटका हो सकती है, यही वजह है कि पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने खुद फ्रंट फुट पर आकर मोर्चा संभाल लिया है।










