जज्बे को सलाम! एम्बुलेंस के लिए नहीं थे पैसे, तो बाइक पर ‘बिस्तर’ बांधकर पत्नी को लेकर निकला पति; 140 KM का सफर तय कर पहुँचा रायपुर एम्स

तारिक खान
डेस्क: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और जीवनसाथी का साथ हो, तो दुनिया की कोई भी विषम परिस्थिति रास्ता नहीं रोक सकती। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के एक छोटे से गांव रेंगाखार के रहने वाले समलू मरकाम ने इस कहावत को हकीकत में बदल दिया है। संसाधनों के अभाव और गरीबी के बीच अपनी बीमार पत्नी कपूरा बाई को बचाने के लिए समलू ने जो किया, उसने आज पूरे प्रदेश का दिल जीत लिया है।

140 किलोमीटर का जोखिम भरा सफर: अपनी पत्नी को इस ‘बाइक एम्बुलेंस’ पर लिटाकर समलू कबीरधाम से रायपुर के लिए निकल पड़ा। जब वह लगभग 9:30 बजे अहिवारा पहुँचा, तो सड़क पर चलने वाले लोग यह नजारा देखकर दंग रह गए। बाइक पर एक महिला को लेटा देख राहगीरों ने उसे रोका। जब समलू ने अपनी दास्तां सुनाई कि वह 140 किलोमीटर दूर रायपुर जा रहा है, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।
*एम्बुलेंस के पैसे नहीं थे, तो बाइक पर लकड़ी की पटरी बिछाकर पत्नी को 140 KM दूर एम्स ले गया पति, Video वायरल*
CG News: कपूरा बाई के दोनों पैर काम नहीं करते हैं और उनकी स्थिति ऐसी है कि वह बैठ भी नहीं सकतीं। समलू के सामने सबसे बड़ी चुनौती पत्नी को रायपुर स्थित एम्स (AIIMS)… pic.twitter.com/mqxaeELoRa
— Dr pukhraj (@pukhrajjakhar29) January 12, 2026
लोगों ने बढ़ाया मदद का हाथ: समलू के इस जज्बे को देखकर अहिवारा के स्थानीय लोगों ने न केवल उसकी हिम्मत बढ़ाई, बल्कि अपनी ओर से आर्थिक सहायता भी प्रदान की। 5 घंटे से अधिक के इस सफर में समलू की पीठ थक चुकी थी, लेकिन उसकी आंखों में पत्नी के ठीक होने की उम्मीद रत्ती भर भी कम नहीं हुई थी।
प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल: समलू की यह कहानी जहाँ एक पति के समर्पण को दिखाती है, वहीं यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं और गरीबों तक एम्बुलेंस पहुँचने की दावों की पोल भी खोलती है। एक लाचार व्यक्ति को अपनी पत्नी को लकड़ी के पटरे पर बांधकर 140 किलोमीटर ले जाना पड़ा, यह हमारे सिस्टम के लिए एक बड़ा सवाल है।











