एमपी में ‘गोबर-गोमूत्र’ शोध में बड़ा खेल! 15 लाख के कच्चे माल का खर्च दिखाया 2 करोड़; कैंसर रिसर्च के नाम पर हवाई यात्रा और गायब गाड़ियाँ

संजय ठाकुर

जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश में गाय के गोबर, मूत्र और दूध (पंचगव्य) से कैंसर के इलाज का शोध करने के लिए शुरू किया गया एक सरकारी प्रोजेक्ट अब भारी भ्रष्टाचार के आरोपों में घिर गया है। जबलपुर के नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय में चल रहे इस प्रोजेक्ट की जाँच रिपोर्ट में चौंकाने वाली वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।

20 लाख का सामान और 2 करोड़ का बिल: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिकअतिरिक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जाँच दल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि साल 2011 से 2018 के बीच गोबर, गोमूत्र और अन्य कच्चे माल की खरीद पर करीब 2 करोड़ रुपये खर्च किए गए। जाँचकर्ताओं का कहना है कि बाजार भाव के हिसाब से इन चीजों की कीमत अधिकतम 15 से 20 लाख रुपये ही होनी चाहिए थी। यानी लागत से कई गुना ज्यादा कीमत पर सामान खरीदना दिखाया गया।

जाँच रिपोर्ट के मुख्य ‘दाग’:

  • हवाई यात्राएं: रिसर्च के नाम पर टीम ने 23–24 बार हवाई यात्राएं कीं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं मिला।
  • बिना मंजूरी की खरीदारी: बजट में प्रावधान न होने के बावजूद ₹7.5 लाख की गाड़ी खरीदी गई।
  • गायब वाहन: जाँच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जिन वाहनों को कागजों पर खरीदा गया दिखाया गया, वे मौके से गायब मिले।
  • रखरखाव पर भारी खर्च: ईंधन और गाड़ी के रखरखाव पर ₹7.5 लाख और फर्नीचर पर ₹15 लाख का खर्च किया गया, जिसे जाँच दल ने ‘गैर-जरूरी’ बताया है।

यूनिवर्सिटी का पक्ष: विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. एस.एस. तोमर ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है:

“मशीनें हों या गाड़ियां, सभी खरीद खुले टेंडर के जरिए सरकारी नियमों के तहत की गई है। कोई घोटाला नहीं हुआ है। हमने जाँच कमेटी को सभी दस्तावेज सौंप दिए हैं।”

आगे क्या? प्रोजेक्ट का उद्देश्य पंचगव्य के जरिए कैंसर का इलाज ढूंढना और किसानों को ट्रेनिंग देना था, लेकिन जाँच दल का कहना है कि ट्रेनिंग का कोई स्पष्ट ब्यौरा नहीं है। फिलहाल जाँच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है, जिसे अब डिविजनल कमिश्नर को भेजा जाएगा। कमिश्नर ही तय करेंगे कि इस मामले में FIR दर्ज होगी या कोई विभागीय कार्रवाई।

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