यमन में गृह युद्ध के बीच ‘अपनों’ में जंग: सऊदी अरब और UAE के बीच टकराव बढ़ा; दक्षिणी गुटों को रियाद आने का न्योता

आदिल अहमद
रियाद/अदन: यमन का गृह युद्ध अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। लंबे समय तक कंधे से कंधा मिलाकर हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाले सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच गठबंधन में गहरी दरार आ गई है। इस तनाव को कम करने और भविष्य का रोडमैप तैयार करने के लिए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने यमन के दक्षिणी गुटों से रियाद में एक महत्वपूर्ण “बातचीत” में शामिल होने की अपील की है।

- सऊदी अरब: यमन की आधिकारिक सरकार और उसकी सेना का समर्थन कर रहा है।
- UAE: दक्षिणी यमन के उन गुटों को ताकत दे रहा है जो एक अलग और स्वतंत्र देश की मांग कर रहे हैं।
नए ‘युद्ध’ का ऐलान: शुक्रवार को UAE समर्थित दक्षिणी गुट ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि एक नया “युद्ध” शुरू हो गया है। इस गुट ने गंभीर आरोप लगाया है कि सऊदी अरब की वायुसेना और उसकी सेना ने उनकी चौकियों पर हमला किया है। यह घटनाक्रम संकेत देता है कि अब लड़ाई हूती विद्रोहियों से हटकर गठबंधन के आंतरिक गुटों के बीच शुरू हो गई है।
क्या है यमन का इतिहास?
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2014: संघर्ष की शुरुआत हुई जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया।
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2015: सऊदी अरब और यूएई के नेतृत्व में अरब देशों के गठबंधन ने सरकार की बहाली के लिए सैन्य हस्तक्षेप किया।
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वर्तमान स्थिति: 10 साल बाद भी युद्ध खत्म नहीं हुआ है, बल्कि अब दक्षिण यमन की आजादी की मांग ने संघर्ष को और जटिल बना दिया है।
रियाद वार्ता का उद्देश्य: सऊदी अरब ने स्पष्ट किया है कि यह बातचीत यमन सरकार के न्योते पर आयोजित की जा रही है। इसका मकसद दक्षिणी मुद्दे का एक ‘न्यायसंगत समाधान’ खोजना और सभी गुटों को एक साथ लाना है ताकि देश को पूरी तरह बिखरने से बचाया जा सके।








