दालमंडी 2.0: “बुलडोजर लगवाकर तुड़वा दूंगा, लोग चिल्लाते रह जाएंगे”— ADM आलोक वर्मा के वायरल वीडियो से वाराणसी में उबाल; क्या संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को शोभा देती है ऐसी भाषा?

वाराणसी: दालमंडी चौड़ीकरण के बीच ADM सिटी आलोक वर्मा का वीडियो वायरल। "बुलडोजर चलवा दूंगा, लोग चिल्लाते रह जाएंगे"— अधिकारी के इन बोल से मचा हड़कंप। कानून के जानकार उठा रहे सवाल— क्या यह विकास है या दमन?

शफी उस्मानी

वाराणसी: धर्म की नगरी काशी के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक इलाके ‘दालमंडी’ में इन दिनों बुलडोजर की गड़गड़ाहट से ज्यादा एक वीडियो की गूँज सुनाई दे रही है। दालमंडी चौड़ीकरण अभियान के बीच वाराणसी के ADM सिटी आलोक वर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है, जिसमें उनके कड़े और कथित तौर पर ‘धमकी भरे’ तेवर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

वीडियो में क्या है? वायरल वीडियो में ADM आलोक वर्मा को साफ तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है— “यहाँ से वहां तक बुलडोजर लगवा कर तुड़वा दूंगा, लोग चिल्लाते रह जाएंगे।” यह बयान उस समय आया है जब प्रशासन उन दो दर्जन भवनों को तोड़ने की प्रक्रिया में है, जिनकी रजिस्ट्री हो चुकी है। लेकिन जिस लहजे में अधिकारी ने यह बात कही, उसे दालमंडी के व्यापारियों और कानून के जानकारों ने ‘अलोकतांत्रिक’ करार दिया है।

टीआरपी और नफरत की राजनीति के बीच दालमंडी दालमंडी इस समय दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ ‘गोदी मीडिया’ इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी टीआरपी की रोटियां सेंक रहा है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया के कुछ ‘नफरती इन्फ्लुएंसर्स’ इस पूरे मामले को सांप्रदायिक रंग देने में जुटे हैं। ‘दालमंडी के गद्दार’ वाले पोस्टर्स के बाद अब इस वायरल वीडियो ने आग में घी डालने का काम किया है।

कानून के जानकारों की राय PNN24 News ने जब इस संबंध में कानून के जानकारों से बात की, तो उन्होंने इसे प्रशासनिक नियमावली के खिलाफ बताया। जानकारों का कहना है कि प्रशासन के पास कानूनी तौर पर अधिग्रहित किए गए भवनों को तोड़ने का अधिकार है, लेकिन किसी अधिकारी द्वारा जनता को यह कहना कि ‘तुम चिल्लाते रह जाओगे और हम बुलडोजर चला देंगे’, उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। यह सीधे तौर पर नागरिकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है।

अधिकारियों का पुराना रिकॉर्ड बता दें कि ADM आलोक वर्मा पहले भी अपने बयानों और कार्यशैली को लेकर विवादों के केंद्र में रहे हैं। दालमंडी जैसे घनी आबादी वाले और संवेदनशील इलाके में जहां पहले से ही लोग अपने आशियाने और दुकानों के टूटने से दुखी हैं, वहां एक जिम्मेदार अधिकारी का ऐसा बयान ‘जख्मों पर नमक’ छिड़कने जैसा है।

विकास जरूरी है, लेकिन क्या विकास की राह ‘धमकी’ और ‘दहशत’ से होकर गुजरनी चाहिए? दालमंडी के लोग अब मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के उच्चाधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।

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