शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत: हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक; कोर्ट रूम में बजीं तालियां, बचाव पक्ष ने FIR को बताया ‘सरकारी प्रायोजित’ साजिश

प्रयागराज: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत! गिरफ्तारी पर लगी रोक। कोर्ट रूम में गूंजी तालियां। बचाव पक्ष ने कहा— "हिस्ट्रीशीटर की साजिश और सरकार द्वारा प्रायोजित है मुकदमा।"

मो0 सलीम

प्रयागराज (PNN24 News): ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी जीत मिली है। बाल यौन शोषण (POCSO) के गंभीर आरोपों में घिरे शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है और अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। जैसे ही अदालत ने राहत का आदेश सुनाया, खचाखच भरे कोर्ट रूम में मौजूद समर्थकों ने तालियां बजाकर खुशी जाहिर की।

सरकार और बचाव पक्ष के बीच तीखी बहस सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने इसे ‘अनिवार्य बाधा’ मानने से इनकार कर दिया।

शंकराचार्य के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और दिलीप गुप्ता ने अदालत में कई चौंकाने वाले तर्क रखे:

  • साजिश का आरोप: बचाव पक्ष ने कहा कि यह पूरा मामला ‘प्रायोजित’ है। पहले 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को मारपीट की अर्जी दी गई, जब वह सफल नहीं हुई तो पॉक्सो की अर्जी दाखिल की गई।
  • शिकायतकर्ता का बैकग्राउंड: कोर्ट को बताया गया कि केस दर्ज कराने वाला व्यक्ति खुद हिस्ट्रीशीटर है, जिस पर गो-हत्या, हत्या और दुष्कर्म जैसे संगीन मामले दर्ज हैं और वह 25 हजार का इनामी भी रहा है।
  • बटुकों की स्थिति: वकील ने सवाल उठाया कि जिन बच्चों को पीड़ित बताया जा रहा है, वे हरदोई के संस्थागत छात्र हैं। उनके माता-पिता का अता-पता नहीं है और मेडिकल भी घटना के एक महीने बाद कराया गया।

विवाद की जड़: माघ मेले का वो टकराव इस पूरे विवाद की शुरुआत इसी साल माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुई थी। शंकराचार्य जब पालकी पर स्नान के लिए जा रहे थे, तब प्रशासन ने भीड़ का हवाला देकर उन्हें रोक दिया था। शंकराचार्य ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने बटुकों की चोटी पकड़कर घसीटा और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। इसके विरोध में शंकराचार्य 11 दिनों तक धरने पर बैठे रहे और अंततः प्रशासन द्वारा माफी न मांगने पर 28 जनवरी को काशी प्रस्थान कर गए थे।

पॉक्सो कोर्ट का वो आदेश बता दें कि यह FIR इलाहाबाद जिला न्यायालय की पॉक्सो कोर्ट के जज विनोद कुमार चौरसिया के आदेश पर झूंसी थाने में दर्ज की गई थी। इसमें शंकराचार्य और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी को आरोपी बनाया गया था।

हाईकोर्ट द्वारा गिरफ्तारी पर रोक लगाना शंकराचार्य के लिए एक बड़ी नैतिक और कानूनी जीत है। बचाव पक्ष के दावों ने इस पूरे मुकदमे की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न चिह्न खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नज़रें हाईकोर्ट के सुरक्षित रखे गए अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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