कोटद्वार में ‘मोहम्मद दीपक’ के समर्थन पर छिड़ा संग्राम; बजरंग दल का भारी विरोध, पुलिस ने दर्ज की FIR, कांग्रेस ने की सुरक्षा की मांग

कोटद्वार: इंसानियत की मिसाल या 'गद्दारी'? मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आए दीपक कश्यप उर्फ 'मोहम्मद दीपक' के खिलाफ बजरंग दल का भारी विरोध। देहरादून से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने जिम पर किया हंगामा। पुलिस ने दर्ज की FIR। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी 

कोटद्वार (उत्तराखंड): उत्तराखंड के पौड़ी जिले का कोटद्वार कस्बा इन दिनों एक दुकानदार के नाम और एक युवक के ‘साहस’ को लेकर सुर्खियों में है। 26 जनवरी को एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में खड़े होने वाले जिम ट्रेनर दीपक कुमार कश्यप (सोशल मीडिया पर चर्चित नाम: मोहम्मद दीपक) के खिलाफ शनिवार को बजरंग दल ने मोर्चा खोल दिया।

विवाद की शुरुआत: ‘बाबा’ शब्द पर आपत्ति पूरा मामला गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) को शुरू हुआ जब बजरंग दल के कार्यकर्ता पटेल रोड स्थित “बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर” पहुंचे। 75 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार पिछले 30 सालों से ‘बाबा कलेक्शन’ के नाम से दुकान चला रहे हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं ने ‘बाबा’ शब्द हटाने का दबाव बनाया। इसी दौरान दीपक कश्यप दुकानदार के समर्थन में आ गए, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

शनिवार को क्या हुआ? 31 जनवरी को यह विवाद तब हिंसक मोड़ लेने लगा जब देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार से बजरंग दल के करीब 150 कार्यकर्ता कोटद्वार पहुंचे।

  • दीपक का आरोप: दीपक के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने उनके जिम पर आकर गाली-गलौज की और उनके परिवार को अपशब्द कहे। उन्होंने पुलिस पर ‘एकतरफा रवैया’ अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें तो थाने में बैठा दिया गया, लेकिन हंगामा करने वालों पर तुरंत लगाम नहीं कसी गई।
  • पुलिस की कार्रवाई: एसएसपी सर्वेश पंवार ने बताया कि पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेकर देहरादून से आए कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही ‘बाबा गारमेंट्स’ के दुकानदार की शिकायत पर भी मुकदमा दर्ज हुआ है।

सियासी हलचल और सुरक्षा की मांग उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने मुख्य सचिव आनंद वर्धन से फोन पर बात कर दीपक कश्यप को तत्काल सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की। धस्माना ने आरोप लगाया कि “सत्तारूढ़ दल के संरक्षण में अराजक तत्व उत्तराखंड की छवि खराब कर रहे हैं।”

दीपक कश्यप का दर्द: भावुक होते हुए दीपक ने कहा, “मैंने जो काम इंसानियत के नाते किया था, उसके बदले जो हुआ उसने मुझे तोड़ दिया। लेकिन मैं अन्याय के खिलाफ खड़ा रहूँगा, चाहे जान ही क्यों न देनी पड़े।” उन्हें अब अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता सता रही है।

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