‘अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानती योगी सरकार’; कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह का बड़ा प्रहार— बोले, गोकशी पर झूठ बोल रहे स्वामी, पिछली सरकारों की देन थे अवैध बूचड़खाने

यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह का बड़ा बयान— "योगी सरकार अविमुक्तेश्वरानंद को नहीं मानती शंकराचार्य।" गोकशी के आरोपों को सिरे से किया खारिज, बोले— 'धार्मिक पद को राजनीति का औजार न बनाएं।'

शफी उस्मानी

बरेली: प्रयागराज माघ मेले से शुरू हुआ विवाद अब लखनऊ तक गरमा गया है। उत्तर प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने शनिवार को बरेली सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मंत्री ने साफ़ लहजे में कहा कि योगी सरकार अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के रूप में मान्यता नहीं देती है।

शंकराचार्य पद पर सरकार का रुख: धर्मपाल सिंह ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य का पद कोई सरकारी नियुक्ति या संवैधानिक पद नहीं है। उन्होंने कहा:

“सरकार किसी व्यक्ति को शंकराचार्य घोषित नहीं करती। यह मठों और धार्मिक परंपराओं का आंतरिक विषय है। योगी सरकार अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानती और न ही उन्हें किसी आधिकारिक मंच से ऐसी कोई मान्यता दी गई है।”

गोकशी के आरोपों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का जवाब: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा प्रदेश में गोकशी के आरोपों को मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया। धर्मपाल सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के आते ही गोकशी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।

  • मांस निर्यात की सच्चाई: उन्होंने बताया कि प्रदेश से केवल सुअर, भैंस और बकरे के मांस का ही निर्यात होता है।
  • अवैध बूचड़खाने: मंत्री ने कहा कि हजारों अवैध बूचड़खानों को बंद किया गया है और गौ-संरक्षण के लिए गौशालाओं का जाल बिछाया गया है।
  • विपक्ष पर निशाना: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जिस गोकशी की बात कर रहे हैं, वह उनके ‘कथित आकाओं’ (पिछली सरकारों) के कार्यकाल की देन थी।

धर्म की आड़ में राजनीति बर्दाश्त नहीं: कैबिनेट मंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि धार्मिक पदों की गरिमा होनी चाहिए और इन्हें राजनीति का औजार नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई धर्म की आड़ लेकर समाज में विद्वेष या भ्रम फैलाता है, तो शासन की ओर से कोई रियायत नहीं मिलेगी। सरकार का मुख्य सिद्धांत विवादों से दूर रहकर सुशासन और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना है।

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