धर्म जगत में हलचल: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर POCSO के तहत FIR; शंकराचार्य ने बताया— “हिस्ट्रीशीटर की साज़िश”, बड़ा खुलासा ‘शिकायतकर्ता का है अपराधिक इतिहास, रेप, गौकशी और धोखाधड़ी जैसे मामले है दर्ज’
प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत FIR दर्ज। नाबालिगों के यौन शोषण का आरोप। शंकराचार्य ने आरोपों को बताया साज़िश, शिकायतकर्ता को बताया हिस्ट्रीशीटर, शिकायतकर्ता पर दर्ज है रेप, गोकशी, धोखाधड़ी से सम्बंधित कुल 21 मामले। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी
प्रयागराज: संगम नगरी प्रयागराज की एक पोक्सो (POCSO) अदालत के आदेश पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके सहयोगी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह एफआईआर नाबालिगों के यौन शोषण के आरोपों के बाद दर्ज की गई है, जिससे धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

- ‘गुरु सेवा’ के नाम पर शोषण: पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें इस कृत्य को ‘गुरु सेवा’ मानने को कहा गया और भविष्य में लाभ का लालच दिया गया।
- महाकुंभ और माघ मेला: शिकायत में कहा गया है कि महाकुंभ 2025 और हालिया माघ मेला 2026 के दौरान भी कैंप और खड़ी कार के भीतर नाबालिगों का शोषण किया गया।
- धमकी और जबरदस्ती: नाबालिगों को बिना कपड़ों के सोने पर मजबूर करने और विरोध करने पर धमकी देने के आरोप भी लगाए गए हैं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: “यह एक गहरी साज़िश” शंकराचार्य ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साज़िश करार दिया है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सच्चाई जल्द ही सबके सामने आ जाएगी।
शिकायतकर्ता के ‘दागदार’ इतिहास पर उठे सवाल इस मामले में एक नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय का आपराधिक रिकॉर्ड सामने आया। शंकराचार्य के शिष्यों और पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से दावा किया गया है कि:
- आशुतोष पांडेय शामली जिले का हिस्ट्रीशीटर (HS No. 76A) है।
- उसके खिलाफ गोवध अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट, दुष्कर्म, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार समेत कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं।
- बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में उसने जगतगुरु रामभद्राचार्य से दीक्षा ली थी और वर्तमान में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट का अध्यक्ष है।
एक तरफ देश के प्रतिष्ठित धर्मगुरु पर लगे संगीन आरोप हैं, तो दूसरी तरफ शिकायतकर्ता का लंबा आपराधिक इतिहास। पुलिस के लिए यह मामला ‘दोधारी तलवार’ जैसा है। जहाँ पोक्सो एक्ट के तहत त्वरित कार्रवाई का प्रावधान है, वहीं शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर उठते सवाल इस कानूनी लड़ाई को और पेचीदा बना रहे हैं।











