उत्तराखंड: रुद्रपुर में नमाज़ पढ़ रहे मज़दूर की बर्बर पिटाई; जबरन लगवाए धार्मिक नारे और रील बनाकर किया वायरल, पुलिस की ‘सुस्ती’ पर उठे सवाल
रुद्रपुर: नमाज़ पढ़ रहे बुज़ुर्ग मज़दूर के साथ बर्बरता! अरविंद शर्मा नामक व्यक्ति ने लात-घूँसों से पीटा, रील बनाई और जबरन धार्मिक नारे लगवाए। पुलिस ने FIR दर्ज की, लेकिन गिरफ्तारी न होने पर उठे सवाल।

तारिक आज़मी
रुद्रपुर (PNN24 News): ‘देवभूमि’ उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर ज़िले से मानवता को शर्मसार करने वाला एक वीडियो सामने आया है। रुद्रपुर में एक निर्माणाधीन मकान में काम करने वाले 52 वर्षीय राजमिस्त्री मोहम्मद शाहिद के साथ उस समय बर्बरता की गई, जब वे मंदिर के पास एक खुले मैदान में नमाज़ अदा कर रहे थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नफरती मानसिकता वाले अभियुक्त के खिलाफ भारी आक्रोश है।

पीड़ित का दर्द: “काम बंद हुआ तो घर कैसे चलेगा?” रुद्रपुर के दूधिया नगर निवासी मोहम्मद शाहिद पिछले 22 वर्षों से राजमिस्त्री का काम कर रहे हैं। शाहिद ने बताया:
“मैं अटरिया देवी मंदिर के पास एक मकान में काम कर रहा था। पास के खाली मैदान में माली से पूछकर नमाज़ पढ़ने बैठा ही था कि अरविंद शर्मा ने हमला कर दिया। उसने मेरा आधार कार्ड और टोपी फेंक दी और डंडे से पीटा। मेरी पसलियों और हाथ में गंभीर चोटें हैं, डॉक्टर ने आराम को कहा है, लेकिन दिहाड़ी नहीं रुकी तो घर का चूल्हा कैसे जलेगा?”
सियासत और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल घटना के बाद स्थानीय पार्षदों और मुस्लिम समुदाय ने सिडकुल चौकी का घेराव कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। हालांकि, FIR दर्ज होने के बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
- पुलिस का तर्क: ऊधम सिंह नगर एसएसपी अजय गणपति ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार 7 साल से कम सज़ा वाले मामलों में पहले नोटिस दिया जाता है।
- कांग्रेस का प्रहार: प्रदेश प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि धार्मिक आस्था के आधार पर हिंसा स्वीकार्य नहीं है।
- बीजेपी का रुख: प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने इसे ‘दो व्यक्तियों के बीच का विवाद’ करार दिया और पुलिस जांच पर भरोसा जताने की बात कही।
क्या नफरत के आगे कानून बौना है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि रील बनाकर सोशल मीडिया पर डालना यह दर्शाता है कि अभियुक्त को कानून का कोई खौफ नहीं है। जिस ज़मीन पर नमाज़ पढ़ी जा रही थी, वह मंदिर से दूर एक खाली मैदान है, जिसे अरशद खान नामक व्यक्ति ने ही मंदिर को मेले के लिए उपलब्ध कराया है। ऐसे में ‘धार्मिक भावनाएं आहत’ होने का तर्क देकर एक कमज़ोर मज़दूर को पीटना केवल नफरत फैलाने की साजिश नज़र आती है।











