सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: NCERT की 8वीं कक्षा की किताब पर लगाया प्रतिबंध; ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर को बताया संस्था की गरिमा पर हमला
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस किताब पर लगाया बैन। 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' चैप्टर पर भड़की अदालत, कहा— "संस्था की गरिमा गिराने का सुनियोजित प्रयास।"

तारिक खान
नई दिल्ली (PNN24 News): देश की सर्वोच्च अदालत ने NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) की सोशल साइंस की आठवीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया है। अदालत की इस कड़ी नाराजगी की वजह किताब का एक विवादास्पद अध्याय है, जिसका शीर्षक ‘करप्शन इन ज्यूडिशरी (न्यायपालिका में भ्रष्टाचार)’ है।

“संस्था को कमजोर करने का सुनियोजित प्रयास” अदालत ने किताब की सामग्री और एनसीईआरटी के निदेशक से प्राप्त जवाब का परीक्षण करने के बाद कड़े शब्दों में आदेश सुनाया। पीठ ने कहा:
“प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि यह न्यायपालिका के संस्थागत अधिकार को कमजोर करने और इसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का एक सुनियोजित प्रयास है। यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो न्यायपालिका में जनता का विश्वास कमजोर होगा।”
चैप्टर में क्या था विवाद? जानकारी के मुताबिक, कक्षा 8 की इस किताब में न्यायपालिका में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और लंबित मामलों (बैकलॉग) की विस्तृत चर्चा की गई थी। अदालत का मानना है कि स्कूली बच्चों के लिए तैयार की गई इस सामग्री में न्यायपालिका के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण पेश किया गया है, जो आने वाली पीढ़ी के मन में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा कर सकता है।
एनसीईआरटी को कड़ी फटकार मुख्य न्यायाधीश ने नाराजगी व्यक्त करते हुए पूछा कि इस तरह की सामग्री को पाठ्यपुस्तक में शामिल करने से पहले उचित जांच और संतुलन (Check and Balance) क्यों नहीं किया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबित मामले एक प्रशासनिक चुनौती हो सकते हैं, लेकिन उन्हें ‘भ्रष्टाचार’ के चश्मे से स्कूली किताबों में पेश करना न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश शिक्षा और संवैधानिक संस्थाओं के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ सकता है। जहाँ एक ओर अभिव्यक्ति और आलोचना का अधिकार है, वहीं दूसरी ओर न्यायपालिका जैसी संस्थाओं की गरिमा की रक्षा करना भी संविधान का अहम हिस्सा है। अब देखना यह होगा कि एनसीईआरटी इस अध्याय को हटाने के बाद नई पुस्तकों के वितरण को लेकर क्या कदम उठाती है।










