वाराणसी: चिरईगाँव चौकी इंचार्ज की कार्यशैली पर सवाल; चोरी की FIR के लिए युवती को सताया, क्या ‘ऊपरी कमाई’ के चक्कर में चोर अब भी है फरार..!

आरोप है कि चौकी इंचार्ज साहब पीड़ित की सुनने के बजाय शातिर चोर की पत्नी के साथ चौकी पर बैठकर 'काउंसलिंग' करने में मशगूल रहे। दरोगा जी चोर की पत्नी को 'मोटिवेट' करते रहे कि उसका पति ₹1.5 लाख का माल लौटा दे। एक कुख्यात चोर, जिस पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं, उसे पकड़ पाना चिरईगाँव पुलिस के लिए 'टेढ़ी खीर' बना हुआ है। जब पुलिस एक पहचान में आए चोर को नहीं पकड़ पा रही, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करें?

शफी उस्मानी

वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट के चौबेपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत चिरईगाँव पुलिस चौकी इन दिनों अपनी ‘अनोखी’ कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। जहाँ एक ओर आला अधिकारी अपराध नियंत्रण का दावा कर रहे हैं, वहीं धरातल पर चौकी इंचार्ज साहब की ‘कुर्सी तोड़’ नौकरी और रसूखदारों से नजदीकी ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है।

FIR नंबर 64/2026: सिस्टम की सुस्ती का ज़िंदा सबूत चिरईगाँव चौकी क्षेत्र में चोरी की एक वारदात 26 जनवरी की सुबह सामने आई थी। पीड़ित युवती उसी दिन से न्याय की गुहार लगाने थाने और चौकी के चक्कर काटती रही। लेकिन आरोप है कि चौकी इंचार्ज साहब पीड़ित की सुनने के बजाय शातिर चोर की पत्नी के साथ चौकी पर बैठकर ‘काउंसलिंग’ करने में मशगूल रहे। दरोगा जी चोर की पत्नी को ‘मोटिवेट’ करते रहे कि उसका पति ₹1.5 लाख का माल लौटा दे, जबकि कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें तत्काल FIR दर्ज कर गिरफ्तारी करनी चाहिए थी।

सोशल मीडिया का खौफ या न्याय की मंशा? पढ़ी-लिखी पीड़ित युवती को जब दरोगा जी ने ‘कोर्ट-कचहरी’ का डर दिखाकर टालने की कोशिश की, तो मामला सोशल मीडिया पर उछल गया। फजीहत होते देख थानेदार साहब ने आनन-फानन में 1 फरवरी को FIR (क्र. 64/2026) दर्ज करने का आदेश दिया। सवाल यह है कि जो काम 26 जनवरी को होना चाहिए था, उसके लिए पुलिस को एक हफ्ते का समय और सोशल मीडिया का दबाव क्यों लगा?

टेबल के नीचे की ‘आय’ और रसूखदारों का संरक्षण स्थानीय लोगों का आरोप है कि चोरी के मामलों में ‘ऊपरी आय’ की संभावना कम होने के कारण दरोगा जी रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं, अगर मामला जमीन संबंधी विवाद का हो, तो अदालती स्टे के बावजूद दरोगा जी सक्रिय हो जाते हैं और दूसरे पक्ष पर सुलह का दबाव बनाने लगते हैं। चर्चा है कि चौकी पर आने के बाद दरोगा जी का ‘निजी विकास’ तो खूब हुआ है, लेकिन क्षेत्र में चोरी की वारदातें भी उतनी ही तेजी से बढ़ी हैं।

कानून-व्यवस्था पर सवाल एक कुख्यात चोर, जिस पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं, उसे पकड़ पाना चिरईगाँव पुलिस के लिए ‘टेढ़ी खीर’ बना हुआ है। जब पुलिस एक पहचान में आए चोर को नहीं पकड़ पा रही, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करें? क्या वाराणसी पुलिस कमिश्नर इस मामले में चौकी इंचार्ज की भूमिका और लापरवाही की जांच कराएंगे?

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