‘तेल की कीमतों पर केंद्र का “मास्टरस्ट्रोक” या “सियासी खेल”? डीज़ल पर एक्साइज ड्यूटी हुई “शून्य”; पवन खेड़ा का वार— “12 साल में 12 बार बढ़ाई ड्यूटी, अब राहत का नाटक क्यों?”‘
बड़ी राहत या चुनावी गणित? केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर ₹10 और डीज़ल पर ₹10 की एक्साइज ड्यूटी घटाई। डीज़ल पर अब 'जीरो' ड्यूटी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 2014 के आंकड़ों से घेरा, बोले— "जनता को नहीं मिला सस्ते कच्चे तेल का लाभ।" PNN24 की विशेष आर्थिक रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
नई दिल्ली (PNN24 News): मध्य-पूर्व में जारी भीषण युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने आम आदमी और तेल कंपनियों को बड़ी राहत देने का दावा किया है। वित्त मंत्रालय ने 26 मार्च को एक ऐतिहासिक अधिसूचना जारी करते हुए पेट्रोल और डीज़ल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (केंद्रीय उत्पाद शुल्क) में भारी कटौती की घोषणा की है।
1. ड्यूटी में कटौती: आंकड़ों का गणित
सरकार ने तत्काल प्रभाव से टैक्स के ढांचे में बड़ा बदलाव किया है:
- पेट्रोल: एक्साइज ड्यूटी ₹13 प्रति लीटर से घटाकर अब मात्र ₹3 प्रति लीटर कर दी गई है।
- डीज़ल: डीज़ल पर लगने वाली ₹10 प्रति लीटर की पूरी ड्यूटी को खत्म कर शून्य (Zero) कर दिया गया है।
- उद्देश्य: पीटीआई के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य HPCL, BPCL और IOC जैसी सरकारी तेल कंपनियों को वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच वित्तीय स्थिरता प्रदान करना है।
2. कांग्रेस का पलटवार: 2014 बनाम 2026
सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर आंकड़ों की झड़ी लगाते हुए सरकार को घेरा:
- कीमतों की तुलना: खेड़ा ने कहा कि मई 2014 में जब कच्चा तेल $106.94 था, तब पेट्रोल ₹71.71 में मिलता था। आज जब युद्ध से पहले कीमतें $70 तक गिरी थीं, तब दिल्ली में पेट्रोल ₹94.72 के पार बिक रहा था।
- रूस का कच्चा तेल: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भारत ने रूस से रियायती दरों पर तेल खरीदा, लेकिन उस मुनाफे का लाभ उपभोक्ताओं को देने के बजाय सरकार ने अपनी तिजोरी भरी।
- टैक्स का खेल: खेड़ा के अनुसार, 2014 से 2026 के बीच सरकार ने 21 बार ड्यूटी बदली, जिसमें 12 बार इसे बढ़ाया गया।
3. भाजपा का पक्ष: “ऐतिहासिक कदम”
वहीं, भाजपा नेताओं और केंद्रीय मंत्रियों ने इस फैसले को प्रधानमंत्री मोदी की ‘जन-कल्याणकारी’ नीति बताया है। उनका तर्क है कि मध्य-पूर्व संकट के कारण जब पूरी दुनिया में ईंधन की कमी है, तब भारत सरकार अपनी कमाई (एक्साइज ड्यूटी) छोड़कर जनता और अर्थव्यवस्था को महंगाई से बचा रही है।
📊 पेट्रोल-डीज़ल टैक्स चार्ट: एक नज़र (Tax Comparison Table)
| विवरण | पहले (Pre-March 26) | अब (Current) | कुल राहत |
| पेट्रोल एक्साइज ड्यूटी | ₹13 / लीटर | ₹3 / लीटर | ₹10 की कटौती |
| डीज़ल एक्साइज ड्यूटी | ₹10 / लीटर | ₹0 / लीटर | ₹10 की कटौती |
| मुख्य लाभार्थी | सरकार | उपभोक्ता और तेल कंपनियाँ | – |











