‘उत्तराखंड के बाद गुजरात में भी UCC का “शंखनाद”: अमित शाह बोले— “तुष्टीकरण का अंत, अब हर नागरिक के लिए एक कानून”‘; विधानसभा में साढे़ सात घंटे चली बहस, कांग्रेस ने किया वॉकआउट
बड़ी खबर: उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी 'समान नागरिक संहिता' (UCC) बिल पारित। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया ऐतिहासिक कदम, बोले— "देश तुष्टीकरण से नहीं, समान कानून से चलेगा।" विपक्ष का सदन से वॉकआउट। PNN24 की विस्तृत रिपोर्ट।

आफताब फारुकी
नई दिल्ली (PNN24 News): भारतीय जनता पार्टी ने अपने स्थापना काल के एक और बड़े संकल्प की ओर कदम बढ़ा दिया है। उत्तराखंड के बाद अब गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को विधानसभा में पारित कर दिया है। मंगलवार देर रात करीब साढे़ सात घंटे की मैराथन बहस के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने इस ऐतिहासिक बिल को बहुमत से पास कराया।
1. अमित शाह का ‘एक्स’ पर प्रहार: “संकल्प हुआ पूरा”
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा:
- समान कानून का संकल्प: “देश में हर नागरिक के लिए एक समान कानून हो, यह भाजपा का स्थापना से ही संकल्प रहा है। मोदी जी के नेतृत्व में राज्य सरकारें इस दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।”
- तुष्टीकरण पर चोट: शाह ने कड़े शब्दों में कहा कि देश ‘तुष्टीकरण’ के आधार पर नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानून से चलना चाहिए। यह हमारी प्राथमिकता और संकल्प दोनों है।
2. विधानसभा में ‘ऐतिहासिक’ बहस और वॉकआउट
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस बिल को सदन में पेश किया, जिसे उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने ‘ऐतिहासिक’ करार दिया।
- लंबी चर्चा: बिल पर करीब साढ़े सात घंटे तक सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई।
- विपक्ष का रुख: वोटिंग के वक्त मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया, जिसके बाद बिल को बहुमत से पारित कर दिया गया।
3. रंजना देसाई समिति का मसौदा
गुजरात सरकार ने इस बिल का खाका तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की सिफारिशों के आधार पर ही विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून का प्रावधान किया गया है।
4. क्या बदलेगा गुजरात में?
UCC लागू होने के बाद गुजरात में रहने वाले सभी समुदायों के लिए व्यक्तिगत कानून (Personal Laws) की जगह एक साझा कानून होगा। इससे बहुविवाह जैसी कुरीतियों पर रोक और उत्तराधिकार के मामलों में महिलाओं को समान अधिकार मिलने की बात कही जा रही है।
📊 UCC का सफर: एक नज़र में (The UCC Journey)
| राज्य | स्थिति | मुख्य प्रावधान |
| उत्तराखंड | लागू होने की प्रक्रिया में | विवाह, तलाक, लिव-इन और संपत्ति में समानता |
| गुजरात | विधेयक पारित (2026) | सभी धर्मों के लिए एक नागरिक संहिता |
| भाजपा का संकल्प | राष्ट्रीय स्तर पर लक्ष्य | तुष्टीकरण का अंत और कानूनी समानता |
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गुजरात में UCC का पारित होना 2026 की राजनीति के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट है। जहाँ भाजपा इसे ‘समानता और न्याय’ के रूप में पेश कर रही है, वहीं विपक्ष इसे ध्रुवीकरण की राजनीति बता रहा है। उत्तराखंड और अब गुजरात के बाद, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य भाजपा शासित राज्य भी इसी राह पर चलते हैं।












