महायुद्ध की चौतरफा मार: सिर्फ तेल ही नहीं, अब दवा, अनाज और स्मार्टफोन भी होंगे महंगे

होर्मुज़ जलडमरूमध्य की नाकेबंदी से वैश्विक सप्लाई चेन ध्वस्त; खाद की कमी से 31% तक बढ़ सकती हैं खाने-पीने की चीज़ें.

तारिक खान

दुनिया की एक-तिहाई खाद (यूरिया, पोटाश, अमोनिया) इसी रास्ते से गुज़रती है। मार्च-अप्रैल का महीना उत्तरी गोलार्ध में बुआई का समय है, और खाद की सप्लाई ठप होने से पूरी फसल बर्बाद हो सकती है।

  • असर: गेहूं की कीमतें 2% और फल-सब्जियों के दाम 5.2% तक बढ़ सकते हैं।
  • सबसे प्रभावित देश: ज़ाम्बिया (31%), श्रीलंका (15%), ताइवान (12%) और पाकिस्तान (11%) में खाद्य सुरक्षा का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
  • रूस की भूमिका: व्लादिमीर पुतिन के दूत का कहना है कि रूस अपनी पैदावार बढ़ाकर इस कमी को पूरा कर सकता है।

2. तकनीक और सेहत पर ‘हीलियम’ का ग्रहण

क़तर से आने वाली दुनिया की एक-तिहाई हीलियम गैस की सप्लाई रुक गई है। यह गैस गुब्बारों के लिए नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक की रीढ़ है।

  • सेमीकंडक्टर चिप्स: स्मार्टफोन, लैपटॉप और कारों में लगने वाले माइक्रोचिप्स बनाने के लिए हीलियम अनिवार्य है। इनकी कीमतों में भारी उछाल आना तय है।
  • अस्पतालों में हाहाकार: MRI मशीनों के मैग्नेट को ठंडा रखने के लिए हज़ारों लीटर हीलियम चाहिए होती है। क़तर के प्लांट को ठीक होने में 3-5 साल लग सकते हैं, जिससे MRI स्कैन बेहद महंगे हो जाएंगे।

3. दवाइयों की किल्लत: भारत पर सीधा असर

दवाइयों (एंटीबायोटिक्स, पेनकिलर्स और वैक्सीन) को बनाने के लिए ज़रूरी पेट्रोकेमिकल्स जैसे मेथनॉल और एथिलीन की सप्लाई बाधित हो गई है।

  • दुबई हब: दुनिया की 20% जेनेरिक दवाइयाँ भारत बनाता है, जो अक्सर दुबई के रास्ते दुनिया भर में भेजी जाती हैं। जंग के कारण यह रूट बंद होने से जीवन रक्षक दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।

4. बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) होंगे महंगे

कच्चे तेल से निकलने वाला ‘सल्फर’ बैटरी बनाने के लिए ज़रूरी धातुओं (लिथियम, कोबाल्ट, निकल) की प्रोसेसिंग में काम आता है।

  • दुनिया का आधा समुद्री सल्फर व्यापार इसी रास्ते से होता है। अब इलेक्ट्रिक वाहनों, ड्रोन और घरेलू उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों का उत्पादन महंगा हो जाएगा।

विशेष चार्ट: होर्मुज़ जलडमरूमध्य की रुकावट का असर

क्षेत्र प्रभावित वस्तु परिणाम
कृषि यूरिया, पोटाश, फॉस्फेट फसल उत्पादन में गिरावट, खाने की वस्तुओं में 31% तक महंगाई।
हेल्थकेयर हीलियम, पेट्रोकेमिकल्स महंगे MRI स्कैन, एंटीबायोटिक्स और वैक्सीन की किल्लत।
टेक/ऑटो हीलियम, सल्फर स्मार्टफोन, लैपटॉप, माइक्रोचिप्स और EV बैटरियों के दाम में बढ़ोतरी।
ईंधन तेल और गैस पेट्रोल-डीजल महंगा, ब्रिटेन जैसे देशों में हीटिंग बिल में भारी वृद्धि।

PNN24 विश्लेषण: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का बंद होना केवल एक युद्ध नहीं, बल्कि एक वैश्विक आर्थिक सुनामी है। अगर यह रास्ता जल्द नहीं खुला, तो दुनिया को दशकों की सबसे बड़ी महंगाई का सामना करना पड़ेगा।

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