‘मिसाइलों की मार, बीमा बाज़ार में हाहाकार’; होर्मुज़ में हमलों के बाद ‘वॉर रिस्क प्रीमियम’ में 500% की बढ़ोतरी, भारतीय आयातकों की बढ़ी मुश्किलें
जहाजों पर हमलों के बीच 'मैरीन इंश्योरेंस' में भारी उछाल! भारतीय आयातकों पर पड़ा करोड़ों का बोझ। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों का 'वॉर रिस्क प्रीमियम' 500% तक बढ़ा। जानिए आपकी जेब पर कैसे पड़ेगा इसका असर।

आदिल अहमद
PNN24 News: मध्य-पूर्व के समुद्र में उड़ रहे ड्रोन और गिर रही मिसाइलों ने केवल जहाजों को ही नुकसान नहीं पहुँचाया है, बल्कि वैश्विक व्यापार के ‘बीमा गणित’ को भी बिगाड़ दिया है। पिछले 48 घंटों में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हुए ताज़ा हमलों के बाद, अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के लिए ‘वॉर रिस्क प्रीमियम’ (War Risk Premium) में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी की है। इसका सीधा और गहरा असर भारतीय आयातकों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ना शुरू हो गया है।
1. बीमा प्रीमियम में 500% तक का उछाल
लंदन स्थित ‘लॉयड्स मार्केट एसोसिएशन’ (LMA) के सूत्रों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र को ‘हाई रिस्क ज़ोन’ (उच्च जोखिम क्षेत्र) की श्रेणी में डाल दिया गया है।
- बढ़ा हुआ बोझ: युद्ध शुरू होने से पहले जिस जहाज का बीमा $10,000 में होता था, अब उसी के लिए कंपनियों को $50,000 से $60,000 तक चुकाने पड़ रहे हैं।
- अतिरिक्त अधिभार: कई शिपिंग कंपनियों ने अब ‘इमरजेंसी रिस्क सरचार्ज’ (ERS) भी लागू कर दिया है, जिससे माल ढुलाई की लागत (Freight Cost) दोगुनी हो गई है।
2. भारतीय आयातकों पर वित्तीय बोझ
भारत अपनी ऊर्जा और इलेक्ट्रॉनिक्स ज़रूरतों के लिए इसी समुद्री रास्ते पर निर्भर है। इस संकट का भारतीय बाज़ार पर तीन तरह से असर पड़ रहा है:
- कच्चा तेल और एलपीजी: भारत आने वाले तेल टैंकरों का बीमा महंगा होने से तेल कंपनियां इस बोझ को ग्राहकों पर डालने की तैयारी में हैं। इससे पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में 15-20% की बढ़ोतरी का खतरा है।
- इलेक्ट्रॉनिक्स और कच्चे माल: चीन और वियतनाम से आने वाले कच्चे माल के जहाज अब लंबी दूरी (केप ऑफ गुड होप) का रास्ता अपना रहे हैं। इससे डिलीवरी में 15 दिन की देरी और लागत में 30% का इज़ाफा हुआ है।
- MSME सेक्टर: छोटे और मध्यम निर्यातक, जो मार्जिन पर काम करते हैं, उनके लिए बढ़ा हुआ माल ढुलाई खर्च मुनाफे को पूरी तरह खत्म कर रहा है।
3. ‘केप ऑफ गुड होप’ का महंगा रास्ता
होर्मुज़ और ओमान की खाड़ी में बढ़ते हमलों (अब तक 16 हमले) के कारण कई शिपिंग दिग्गजों ने अपने जहाजों का रास्ता बदल दिया है।
- दूरी: अफ्रीका के नीचे से घूमकर आना करीब 6,000 किलोमीटर अतिरिक्त यात्रा है।
- खर्च: एक बड़े कंटेनर जहाज के लिए इस रास्ते से आने पर ईंधन का खर्च $1 मिलियन (करीब 8.3 करोड़ रुपये) बढ़ जाता है।
4. विशेषज्ञों की चेतावनी: ‘सप्लाई चेन शॉक’
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध अगले दो सप्ताह और चला, तो भारत में ‘सप्लाई चेन शॉक’ (आपूर्ति श्रृंखला में बाधा) पैदा हो जाएगा। इससे आवश्यक वस्तुओं की कमी हो सकती है और मुद्रास्फीति (Inflation) की दर 7% के पार जा सकती है।
भारतीय आयातकों के लिए यह ‘दोहरी मार’ है। एक तरफ माल की सुरक्षा का खतरा है और दूसरी तरफ आसमान छूती बीमा दरें। सरकार को अब ‘सॉवरेन गारंटी’ (Sovereign Guarantee) या विशेष बीमा फंड पर विचार करना होगा ताकि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखा जा सके।










