बिहार में दो दशकों के ‘नीतीश राज’ का समापन: नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए किया नामांकन; अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली कूच की तैयारी, समर्थकों की आँखों में आंसू

बिहार में 'नीतीश युग' का अंत! मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा नामांकन। अमित शाह की मौजूदगी में पटना में बड़ा सियासी बदलाव। जानिए नीतीश ने क्यों छोड़ी सीएम की कुर्सी और कौन होगा बिहार का अगला चेहरा?

मो0 सलीम 

PNN24 News: बिहार की सियासत में आज एक युग का अंत हो गया। पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार ने आखिरकार मुख्यमंत्री की कुर्सी को अलविदा कहकर देश की संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा का रुख कर लिया है। गुरुवार को पटना में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नीतीश कुमार ने अपना नामांकन दाखिल किया, जिससे उन तमाम अटकलों पर विराम लग गया जो पिछले कई महीनों से चल रही थीं।

1. “एक अधूरी इच्छा हुई पूरी”: नीतीश का भावुक संदेश

नामांकन के बाद नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक लंबा पोस्ट लिखकर बिहार की जनता का आभार जताया। उन्होंने अपने इस फैसले के पीछे एक पुरानी इच्छा का जिक्र किया:

“संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के भी दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में मैं इस बार राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।”

2. बिहार की नई सरकार को ‘मार्गदर्शन’ का वादा

नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि भले ही वह दिल्ली जा रहे हैं, लेकिन बिहार से उनका नाता नहीं टूटेगा। उन्होंने लिखा कि जो नई सरकार बनेगी, उसे उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। गौरतलब है कि नीतीश कुमार साल 2005 से (जीतन राम मांझी के कुछ महीनों के कार्यकाल को छोड़कर) लगातार बिहार के मुख्यमंत्री बने रहे। उन्होंने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

3. पटना में हाई-प्रोफाइल ड्रामा और कार्यकर्ताओं का विरोध

नीतीश कुमार के इस फैसले से उनके समर्थक खुश नहीं हैं। गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास के बाहर जेडीयू कार्यकर्ताओं ने भारी विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं की मांग थी कि “नीतीश कुमार को ही मुख्यमंत्री बने रहना चाहिए।” हालांकि, बीजेपी और जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुए समझौते के तहत अब बिहार में सत्ता का नया समीकरण तैयार हो रहा है।

4. अमित शाह का पटना दौरा और चिराग की बधाई

गृह मंत्री अमित शाह का इस मौके पर पटना पहुँचना यह दर्शाता है कि यह बदलाव एनडीए (NDA) की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। एलजेपी (आर) नेता चिराग पासवान ने भी नीतीश कुमार को बधाई देते हुए कहा कि उनके अनुभव से संसद के उच्च सदन को मजबूती मिलेगी।

📊 नीतीश कुमार: एक बेमिसाल राजनीतिक सफर

  • पहली बार सीएम: साल 2000 (बहुमत साबित नहीं कर पाए)।
  • सत्ता पर पकड़: 2005 से लगातार (2014-15 के कुछ महीनों को छोड़कर)।
  • रिकॉर्ड: बिहार के इतिहास में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता।
  • पहचान: किसी भी गठबंधन की सरकार हो, ‘चेहरा’ हमेशा नीतीश कुमार ही रहे।

🔎 अब आगे क्या?

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से बिहार की राजनीति में एक ‘वैक्यूम’ (खालीपन) पैदा होगा। अब सवाल यह है कि बिहार की कमान किसके हाथों में जाएगी? क्या बीजेपी अपना मुख्यमंत्री बनाएगी या जेडीयू से ही कोई नया चेहरा सामने आएगा? अमित शाह की मौजूदगी संकेत दे रही है कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी या विजय सिन्हा में से कोई एक बड़ी भूमिका में आ सकता है।

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