‘अतिथि देवो भव:’ बनाम ‘रणनीतिक खामोशी’: भारत के मेहमान ईरानी युद्धपोत ‘IRIS डेना’ को अमेरिका ने हिंद महासागर में डुबोया; 80 शव बरामद, विपक्ष ने पूछा— “पीएम मोदी चुप क्यों हैं?”

हिंद महासागर में बारूद की गंध! भारत के 'मिलन' अभ्यास से लौट रहे ईरानी युद्धपोत 'डेना' को अमेरिका ने टॉरपीडो से डुबोया। 140 नाविक लापता। मोदी सरकार की चुप्पी पर बिफरा विपक्ष, पूर्व राजनयिकों ने भी उठाए कड़े सवाल।

आफताब फारुकी

नई दिल्ली/कोलंबो (PNN24 News): हिंद महासागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बुधवार (4 मार्च) को घटी एक घटना ने भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिका ने अपनी परमाणु पनडुब्बी से टॉरपीडो दागकर ईरानी युद्धपोत ‘IRIS डेना’ (Frigate Dena) को डुबो दिया है। यह वही जहाज़ था जो विशाखापत्तनम में भारत द्वारा आयोजित ‘मिलन 2026’ (International Fleet Review) सैन्य अभ्यास में भारत के राजकीय मेहमान के रूप में शामिल हुआ था।

1. हमले का शिकार बना ‘निहत्था’ मेहमान?

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और कई रक्षा विशेषज्ञों ने दावा किया है कि ‘मिलन’ अभ्यास के प्रोटोकॉल के अनुसार, शामिल होने वाले जहाज़ गोला-बारूद नहीं ले जा सकते।

“ईरानी जहाज़ निहत्था था और उसके कर्मियों ने भारत की राष्ट्रपति के सामने परेड की थी। अमेरिका ने भारत की संवेदनशीलता को नज़रअंदाज़ करते हुए इस निहत्थे मेहमान पर जानबूझकर हमला किया।” — कंवल सिब्बल, पूर्व विदेश सचिव

2. श्रीलंका ने की 80 मौतों की पुष्टि

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि ईरान को लगा था कि वह अंतरराष्ट्रीय पानी में सुरक्षित है। वहीं, श्रीलंका की नौसेना ने बताया कि:

  • जहाज़ पर कुल 180 नाविक सवार थे।
  • अब तक 80 शव मिल चुके हैं और 140 लोग लापता या मृत माने जा रहे हैं।
  • श्रीलंकाई नौसेना ने समुद्र में तैरते हुए 32 नाविकों को बचाया है।

3. भारत में सियासी घमासान: “कायरता मंज़ूर नहीं”

इस घटना पर मोदी सरकार की खामोशी को विपक्ष ने ‘राष्ट्रीय शर्म’ बताया है।

  • कांग्रेस (सुप्रिया श्रीनेत): “जिन्हें हमने मेहमान बनाकर बुलाया, उन्हें लौटते वक्त हमारे ही समुद्री क्षेत्र के पास मार दिया गया। पीएम मोदी का समझौता भारत को शर्मिंदा कर रहा है।”
  • AAP (संजय सिंह): “राष्ट्रपति के सामने जिस जहाज़ की खूबियाँ बताई गईं, उसे अमेरिका ने मार गिराया और मोदी जी खामोश हैं। यह इतिहास में कायरता के रूप में दर्ज होगा।”
  • RJD (प्रियंका भारती): “एक गैर-युद्धक कार्रवाई से लौट रहे जहाज़ पर अमेरिकी पनडुब्बी ने छुपकर वार किया। भारत की प्रतिक्रिया कहाँ है?”

4. सरकार का बचाव और PIB फैक्ट चेक

भारत सरकार ने कर्नल डगलस मैक्ग्रेगर के उस दावे को ‘भ्रामक और गलत’ बताया है जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान पर हमले के लिए भारतीय नौसैनिक अड्डों का इस्तेमाल कर रहा है। पीआईबी ने साफ किया कि भारत की धरती का इस्तेमाल इस हमले के लिए नहीं हुआ है।

5. कूटनीतिक कोने में धकेला जाता भारत?

पूर्व राजनयिक केसी सिंह ने चेतावनी दी है कि चुप्पी हमेशा कूटनीति नहीं होती। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रपति ट्रंप पहले भी अपने उन सहयोगियों (जैसे नेटो) को फटकार चुके हैं जिन्होंने उनके लिए सैनिक खोए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘नैतिक और मानवीय ज़िम्मेदारी’ बनती है क्योंकि ईरानी जहाज़ भारत के न्योते पर वहां मौजूद था।

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