‘अमेरिका में “नो किंग्स” रैलियों का महाकुंभ: ट्रंप प्रशासन के खिलाफ सड़कों पर उतरे लाखों लोग; ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने सुरों से भरी हुंकार, व्हाइट हाउस बोला— “यह सिर्फ विरोधियों का हिस्टीरिया है!”‘
अमेरिका में जनसैलाब: 'नो किंग्स' रैलियों के तीसरे दौर में लाखों लोग सड़कों पर। ट्रंप की इमिग्रेशन नीतियों, ईरान युद्ध और महंगाई के खिलाफ न्यूयॉर्क से लंदन तक प्रदर्शन। व्हाइट हाउस ने बताया 'मानसिक सत्र', तो जनता ने कहा— "यह अमेरिका है, यहाँ राजा नहीं चलता।" PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News: संयुक्त राज्य अमेरिका इस समय एक अभूतपूर्व आंतरिक राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ ‘नो किंग्स’ (No Kings) रैलियों का तीसरा और सबसे विशाल दौर शुरू हो चुका है। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर मिनेसोटा की बर्फीली सड़कों तक, लाखों अमेरिकी नागरिक “लोकतंत्र बचाओ” के नारों के साथ लामबंद हैं।
1. प्रदर्शन के मुख्य केंद्र और मुद्दे
प्रदर्शनकारियों का गुस्सा मुख्य रूप से तीन मोर्चों पर है:
- ईरान के साथ युद्ध: पश्चिम एशिया में बढ़ती सैन्य सक्रियता और युद्ध के खतरों के खिलाफ भारी जनमत।
- सख्त इमिग्रेशन कानून: मिनेसोटा में ICE की कार्रवाई में दो नागरिकों की मौत ने आग में घी का काम किया है।
- अधिनायकवाद का डर: ट्रंप द्वारा राष्ट्रपति की शक्तियों के विस्तार और ‘एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स’ के बढ़ते इस्तेमाल को आलोचक ‘अलोकतांत्रिक’ बता रहे हैं।
2. मिनेसोटा से उठी इंसाफ की आवाज़
इस बार के प्रदर्शनों का भावनात्मक केंद्र मिनेसोटा रहा, जहाँ रेनी निकोल गुड और एलेक्स प्रेटी की मौत के बाद गुस्सा चरम पर है। यहाँ मशहूर रॉक स्टार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने अपना नया गीत “स्ट्रीट्स ऑफ मिनियापोलिस” गाकर प्रदर्शनकारियों में जोश भर दिया। स्टेट कैपिटल बिल्डिंग के बाहर हज़ारों लोगों ने इमिग्रेशन एजेंटों की मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
3. व्हाइट हाउस का रुख: “यह थेरेपी सेशन है”
जहाँ एक तरफ सड़कों पर जनसैलाब है, वहीं व्हाइट हाउस इन प्रदर्शनों को गंभीरता से लेने के बजाय तंज कस रहा है। प्रवक्ता ने इसे “ट्रंप डिरेंजमेंट थेरेपी सेशन” करार दिया। खुद राष्ट्रपति ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में इन आरोपों को बेतुका बताते हुए कहा, “वे मुझे राजा कह रहे हैं, लेकिन मैं राजा नहीं हूँ। मैं बस देश को दोबारा बनाने की कोशिश कर रहा हूँ।”
4. सात समंदर पार भी गूँज
यह विरोध प्रदर्शन सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। लंदन, पेरिस और लिस्बन जैसे यूरोपीय शहरों में भी अमेरिकी प्रवासियों ने रैलियां निकालीं। पोस्टरों पर ट्रंप को ‘फासीवादी’ और ‘युद्ध अपराधी’ बताते हुए उन पर महाभियोग (Impeachment) चलाने की मांग की गई।
📊 ‘नो किंग्स’ रैली: एक नज़र में (Protest Facts)
| शहर | प्रदर्शन का पैमाना | मुख्य आकर्षण / घटना |
| न्यूयॉर्क | 1 लाख से अधिक | टाइम्स स्क्वायर और मैनहैटन में मार्च |
| वॉशिंगटन डीसी | लाखों की भीड़ | नेशनल मॉल और लिंकन मेमोरियल खचाखच भरा |
| मिनेसोटा | हज़ारों लोग | ब्रूस स्प्रिंगस्टीन का प्रदर्शन |
| लंदन/पेरिस | प्रवासी अमेरिकी | महाभियोग की मांग और पोस्टर प्रदर्शन |










