‘प्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं तो कैसा सहयोग?’; पलिया में ड्रग्स माफिया पर कार्रवाई को लेकर पुलिस और सभासदों में तकरार, पीस कमेटी की बैठक का सामूहिक बहिष्कार
पलिया में ड्रग्स माफिया के खिलाफ जंग में पुलिस और जनप्रतिनिधि आमने-सामने। भाजपा सभासद को मिली जान से मारने की धमकी के बाद कोतवाली में हंगामा। सभासदों ने किया पीस कमेटी की बैठकों का बहिष्कार। जानिए क्या है पूरा विवाद।

फारुख हुसैन
पलिया कलां, लखीमपुर खीरी (PNN24 News): भारत-नेपाल सीमा पर बसे पलिया नगर में नशे के अवैध कारोबार ने अब पुलिस प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर दी है। एक ड्रग तस्कर को पकड़वाने वाले भाजपा सभासद को मिली जान से मारने की धमकी और पुलिस की कथित ढुलमुल कार्यप्रणाली से नाराज़ दर्जनों सभासदों ने कोतवाली में जमकर हंगामा किया और पुलिस के साथ भविष्य में किसी भी सहयोग से इनकार कर दिया है।
1. विवाद की जड़: सभासद को मिली सरेआम धमकी
मामला मोहल्ला रंगरेजान द्वितीय के भाजपा सभासद मनोज गुप्ता से जुड़ा है। सभासद ने एक ड्रग स्मगलर को पकड़कर पुलिस को सूचना दी थी। सभासद का आरोप है कि पुलिस काफी देरी से मौके पर पहुँची, जिसका फायदा उठाकर बेखौफ माफिया ने सार्वजनिक रूप से सभासद को जान से मारने की धमकी दे डाली। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नगर के जनप्रतिनिधियों में उबाल आ गया।
2. कोतवाली में तीखी नोकझोंक और ‘बुलडोजर’ की मांग
बुधवार को सभासद मनोज गुप्ता के नेतृत्व में सभासदों का एक प्रतिनिधिमंडल कोतवाली पहुँचा।
- मांग: सभासदों ने मांग की कि नशे के सौदागरों के खिलाफ केवल मुकदमा दर्ज करना काफी नहीं है, बल्कि उनकी संपत्ति कुर्क कर बुलडोजर की कार्रवाई की जाए।
- टकराव: इस मांग पर कोतवाली प्रभारी पंकज त्रिपाठी और सभासदों के बीच तीखी बहस हो गई। सभासदों ने पुलिस पर असहयोग और माफियाओं के प्रति नरम रुख अपनाने का आरोप लगाया।
3. पुलिस का पक्ष: “कानून के दायरे में हो रही कार्रवाई”
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रभारी निरीक्षक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि पुलिस प्रशासन गैंगस्टर, जिला बदर और संपत्ति कुर्की जैसी कड़ी कार्रवाई पहले से ही कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुलडोजर जैसी कार्रवाई शासन के विशिष्ट आदेशों और विधिक प्रक्रिया के अधीन होती है। हालांकि, इस जवाब से सभासद संतुष्ट नहीं हुए और बिना प्रार्थना पत्र दिए ही कोतवाली से बाहर निकल आए।
4. पीस कमेटी का बहिष्कार और सामूहिक रोष
नाराज़ सभासदों ने अब एक बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की है कि जब तक ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ कोई निर्णायक और ज़मीनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक पलिया नगर पालिका का कोई भी सभासद पुलिस द्वारा आयोजित किसी भी पीस कमेटी या आधिकारिक बैठक में हिस्सा नहीं लेगा। सभासदों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
📊 विवाद के मुख्य बिंदु (Fact-Box)
| पक्ष | मुख्य तर्क / स्टैंड |
| सभासद (मनोज गुप्ता व अन्य) | माफियाओं पर बुलडोजर चले और जनप्रतिनिधियों को सुरक्षा मिले। |
| पुलिस (पंकज त्रिपाठी) | गैंगस्टर और जिला बदर जैसी कार्रवाई जारी है, बुलडोजर विधिक मामला है। |
| विरोध का स्वरूप | पीस कमेटी की बैठकों का सामूहिक और अनिश्चितकालीन बहिष्कार। |
| क्षेत्रीय प्रभाव | सीमावर्ती इलाका होने के कारण ड्रग्स तस्करी एक बड़ी सुरक्षा चुनौती। |











