‘जिस थाली में खाया, उसी में छेद?’; दालमंडी में दशकों से जमी दुकान, अब बेटे ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समाज को दी भद्दी गालियाँ; प्रशासन की ‘चुप्पी’ पर उठे सवाल

वाराणसी के दालमंडी में नफरत की 'चाट': जिस समाज ने व्यापार दिया, उसी के खिलाफ उगला ज़हर। श्याम सुंदर के बेटे रितेश की अभद्र सोशल मीडिया पोस्ट से मुस्लिम समाज में भारी रोष। पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक आज़मी 

वाराणसी (PNN24 News): काशी की साझा विरासत और गंगा-जमुनी तहजीब के केंद्र दालमंडी इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। मामला ‘चाहमामा कुआ’ (मस्जिद नाद-ए-अली के पास) स्थित प्रसिद्ध ‘श्याम सुंदर चाट भंडार’ से जुड़ा है, जहाँ व्यापारिक ऊंचाइयों को छूने वाले परिवार के बेटे ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समाज के खिलाफ नफरत और अभद्रता की सारी हदें पार कर दी हैं।

आरोपी फोटो साभार बीएम ब्रेकिंग न्यूज़

1. दशकों का साथ और नफरत का ‘इनाम’

स्थानीय लोगों के मुताबिक, श्याम सुंदर ने एक मामूली खोमचे से अपना सफर शुरू किया था। दालमंडी के मुस्लिम समाज ने उन्हें भरपूर प्यार और व्यापार दिया, जिसके दम पर आज वे शादियों में लाखों के ऑर्डर बुक करते हैं। लेकिन आरोप है कि इसी संपन्नता के बीच उनके बेटे रितेश ने सोशल मीडिया पर मुस्लिम समाज और उनके बच्चों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट साझा की है।

2. सोशल मीडिया पर ‘ज़हरीली’ पोस्ट

होली के बाद रितेश द्वारा की गई पोस्ट ने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। पोस्ट में इस्तेमाल किए गए शब्द इतने भद्दे हैं कि कोई भी सभ्य समाज उसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जिस समाज के बीच रहकर कारोबार फला-फूला, आज उसी को गालियाँ देना न केवल विश्वासघात है, बल्कि एक गहरी साजिश का हिस्सा भी प्रतीत होता है।

3. पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे हैरान करने वाली बात वाराणसी पुलिस और स्थानीय प्रशासन की ‘खामोशी’ है।

  • निष्पक्षता पर सवाल: इलाके में चर्चा है कि यदि यही कृत्य किसी दूसरे समुदाय के युवक ने किया होता, तो अब तक ‘बुलडोजर’ की कार्रवाई या जेल की सलाखें तय होतीं।
  • अधिकारियों पर निशाना: एसीपी दशाश्वमेघ अतुल अंजान और चौक इंस्पेक्टर की तवज्जो न देना स्थानीय लोगों के बीच रोष का कारण बना हुआ है। जनता पूछ रही है कि क्या ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा केवल कागजों तक सीमित है?

4. व्यापारिक क्षेत्र में तनाव की आहट

दालमंडी एक बेहद संवेदनशील और प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र है। इस तरह की हरकतें न केवल धार्मिक भावनाओं को भड़काती हैं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे आपसी विश्वास को भी खत्म करती हैं। मुस्लिम समाज में इस घटना को लेकर गहरा दुख और आक्रोश है। लोगों का मानना है कि रितेश को ‘हिंदू हृदय सम्राट’ बनाने की चाहत में श्याम सुंदर ने उसे ऐसी दीक्षा दी है जो समाज के लिए घातक है।


📌 खुद की तबाही की शिकायत जाकर करे हम किससे..?:

धार्मिक भावनाएं भड़काना और किसी समाज विशेष को निशाना बनाना कानूनन अपराध है। PNN24 News प्रशासन से यह सवाल करता है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई होगी? सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों को कानून का डर दिखाना शांति व्यवस्था के लिए अनिवार्य है। सवाल तो ये है कि अगर ऐसी पोस्ट रितेश कुमार की जगह किसी ‘रितेश खान या अहमद’ ने किया होता तो शायद यही प्रशासन जो अभी तक खामोश है उसको कालर पकड़ कर घसीटते हुवे ले जाता और जेल में ठूस देता। घर पर नोटिस चिपक कर बुल्डोज़र खड़ा हो गया होता और हंगामा हो रहा होता। मगर श्याम सुंदर के बेटवा शायद “हिन्दू ह्रदय सम्राट” बन रहा होगा।

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