मध्य-पूर्व संकट: क्या पाकिस्तान बनेगा ‘शांतिदूत’? ईरान से लंबी बात के बाद 3 देशों के विदेश मंत्री पहुँच रहे इस्लामाबाद
शहबाज़ शरीफ़ की मसूद पेज़ेश्कियान से एक घंटे तक चली बातचीत; सऊदी, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्री भी कल उतरेंगे पाकिस्तान की धरती पर.

आदिल अहमद
PNN24 News: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर विस्तृत चर्चा की। शरीफ़ के मुताबिक, यह बातचीत एक घंटे से भी अधिक समय तक चली। इस दौरान शरीफ़ ने अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ जारी पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों का ज़िक्र किया। उन्होंने साफ़ किया कि पाकिस्तान क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए लगातार संपर्क में है।
इसराइल के हमलों की निंदा और एकजुटता
प्रधानमंत्री शरीफ़ ने ईरान पर इसराइली हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने न केवल ईरान के साथ एकजुटता जताई, बल्कि शांति की बहाली के लिए पाकिस्तान की मेज़बानी की पेशकश भी दोहराई। पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने का प्रस्ताव दिया है, जिसे वैश्विक कूटनीति में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस्लामाबाद बनेगा कूटनीति का केंद्र: 29-30 मार्च का अहम दौरा
मध्य-पूर्व में जारी युद्ध की आहट के बीच, पाकिस्तान अब एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता दिख रहा है। विदेश मंत्री इसहाक़ डार के निमंत्रण पर तीन प्रमुख मुस्लिम देशों—सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र—के विदेश मंत्री 29 और 30 मार्च को पाकिस्तान पहुँच रहे हैं।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- ये तीनों नेता प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाक़ात करेंगे।
- चर्चा का मुख्य केंद्र क्षेत्र में तनाव कम करना और युद्ध की स्थिति को टालना होगा।
- अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के जरिए ही ईरान को 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव सौंपा गया है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इन दौरों का मकसद क्षेत्र में स्थिरता लाना है। क्या पाकिस्तान वास्तव में अमेरिका और ईरान के बीच की खाई को पाट पाएगा? यह आने वाले दो दिनों की बैठकों पर निर्भर करेगा।









