‘चुप्पी कूटनीति नहीं, कायरता है’: सोनिया गांधी ने ईरान युद्ध और ख़ामेनेई की ‘हत्या’ पर मोदी सरकार को घेरा; संसद के बजट सत्र में आर-पार की तैयारी
ईरान युद्ध पर सोनिया गांधी का मोदी सरकार पर बड़ा हमला! 'द इंडियन एक्सप्रेस' के लेख में लिखा— "ख़ामेनेई की हत्या पर चुप्पी न्यूट्रल होना नहीं, जिम्मेदारी से भागना है।" संसद में बहस की मांग।

आफताब फारुकी
नई दिल्ली (PNN24 News): मध्य पूर्व में जारी महायुद्ध और ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत पर भारत की खामोशी अब घरेलू राजनीति में एक बड़े तूफान का सबब बन गई है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को मोदी सरकार के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘भारत की विश्वसनीयता पर चोट’ करार दिया है।
“न्यूट्रल नहीं, ज़िम्मेदारी से पीछे हटना”
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में प्रकाशित अपने एक विशेष लेख में सोनिया गांधी ने केंद्र सरकार पर कूटनीतिक विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
“ईरान के सर्वोच्च नेता की ‘हत्या’ पर सरकार की मौजूदा चुप्पी कोई न्यूट्रल रुख नहीं है, बल्कि यह अपनी नैतिक और वैश्विक ज़िम्मेदारी से पीछे हटना है। इससे भारत की विदेश नीति की स्वतंत्र दिशा और साख पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।”
संसद में ‘आर-पार’ की मांग
सोनिया गांधी ने सरकार से टालमटोल की नीति छोड़ने को कहा है। उन्होंने मांग की है कि संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जैसे ही शुरू हो, सरकार को इस मुद्दे पर सदन में खुलकर बहस करनी चाहिए। कांग्रेस का रुख साफ है कि भारत को एक ‘उभरती हुई वैश्विक शक्ति’ के तौर पर इस मानवीय और कूटनीतिक संकट पर अपनी बात मज़बूती से रखनी चाहिए थी।
नैतिक ताकत को पहचानने की ज़रूरत
पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष ने लेख में जोर दिया कि भारत को अपनी उस पुरानी ‘नैतिक ताकत’ को फिर से पहचानने की ज़रूरत है, जिसके लिए वह गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के समय से जाना जाता रहा है। उन्होंने कहा कि स्पष्टता और प्रतिबद्धता की कमी भारत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर कमज़ोर दिखा रही है।
सोनिया गांधी का यह हमला तब आया है जब महबूबा मुफ़्ती और असदुद्दीन ओवैसी जैसे नेता पहले ही सरकार को घेर चुके हैं। विपक्ष इस मुद्दे को ‘बजट सत्र’ में सरकार के खिलाफ एक बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी में है। विशेषकर तब, जब युद्ध में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो चुकी है, विपक्ष अब सरकार से ‘दोस्ताना संबंधों’ से ऊपर उठकर राष्ट्रहित और क्षेत्रीय स्थिरता पर जवाब मांगेगा।










