‘युद्ध और शांति के बीच फँसा मध्य-पूर्व: पाकिस्तान बनेगा अमेरिका-ईरान की “गुप्त मुलाकात” का गवाह? इज़राइल के भीतर मची रार— “थक चुकी है हमारी सेना!”‘
बड़ी खबर: पाकिस्तान में हो सकती है अमेरिका और ईरान की सीधी मुलाकात। ट्रंप ने 10 दिन के लिए टाले हमले, लेकिन 10 हजार अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी। इज़राइल में बवाल— विपक्षी नेता यायर लैपिड बोले, "हमारी सेना पतन की कगार पर है।" तेहरान फिर धमाकों से दहला। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

तारिक खान
PNN24 News: मध्य-पूर्व का रणक्षेत्र अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है जहाँ एक तरफ बंदूकों की गर्जना है और दूसरी तरफ कूटनीति की बिसात। जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल के सनसनीखेज खुलासे के बाद दुनिया की नज़रें पाकिस्तान पर टिक गई हैं, जहाँ अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच पहली बार ‘सीधी बातचीत’ की संभावना जताई जा रही है।
1. पाकिस्तान में ‘अदृश्य’ मुलाकात की तैयारी
जर्मनी के विदेश मंत्री के अनुसार, अब तक अप्रत्यक्ष संपर्कों के बाद अब दोनों देश आमने-सामने बैठने को तैयार हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के पूर्व दूत रॉबर्ट मैली ने आगाह किया है कि ट्रंप द्वारा हमलों को 10 दिन टालने का मतलब शांति नहीं, बल्कि ज़मीनी हमले की तैयारी भी हो सकता है।
2. ट्रंप की ‘दोहरी चाल’: वार्ता का प्रस्ताव और 10 हज़ार सैनिक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिख रहे हैं कि ईरान समझौता करना चाहता है, वहीं दूसरी ओर ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के अनुसार वे 10,000 अतिरिक्त सैनिक और बख्तरबंद वाहन क्षेत्र में भेजने पर विचार कर रहे हैं। इसे ‘वार्ता की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति’ माना जा रहा है।
3. इज़राइल में ‘इंटरनल’ इमरजेंसी: “सेना घायल है”
इज़राइल के भीतर से चौंकाने वाली खबरें आ रही हैं। विपक्षी नेता यायर लैपिड ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा है कि सेना (IDF) अपनी क्षमता से बाहर जाकर लड़ रही है और अब पतन के कगार पर है। उन्होंने मांग की है कि अति-रूढ़िवादी यहूदियों (हरेदी) को भी सेना में भर्ती किया जाए, जिन्हें अब तक छूट मिलती रही है।
4. तेहरान में फिर धमाके, इंटरनेट ठप
तेहरान एक बार फिर धमाकों की आवाज़ से दहल उठा है। इज़राइल ने आधिकारिक पुष्टि तो नहीं की, लेकिन उसके प्रवक्ता ने साफ कहा है कि वे ईरान के हथियार उद्योगों के 1000 से ज्यादा केंद्रों को निशाना बना रहे हैं। तेहरान के निवासियों का कहना है कि वे अब प्रतिबंधों, महंगाई और बिना इंटरनेट के युद्ध के बीच जीने के ‘आदी’ हो चुके हैं।










