1700 किलो का टॉरपीडो और ‘IRIS देना’ का अंत: गॉल हार्बर से 35 किमी दूर अमेरिका ने किया ‘शिकार’; क्या भारत के मेहमान की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी थी?

श्रीलंका के तट पर 'IRIS देना' का जलसमाधि: अमेरिका के मार्क-48 टॉरपीडो ने कैसे किया शिकार? क्या अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत यह हमला वैध था? जानिए भारत की सीमा के कितने करीब है यह महायुद्ध।

शफी उस्मानी

नई दिल्ली (PNN24 News): 4 मार्च की सुबह 5 बजे, जब दुनिया सो रही थी, हिंद महासागर की लहरों के नीचे एक अमेरिकी पनडुब्बी ने इतिहास का सबसे विवादित हमला किया। श्रीलंका के गॉल (Galle) शहर से मात्र 19 नॉटिकल माइल्स दूर, ईरानी युद्धपोत ‘देना’ को अमेरिका ने अपने सबसे घातक मार्क-48 (Mark 48) टॉरपीडो से डुबो दिया। 84 शव बरामद किए जा चुके हैं और यह घटना अब अंतरराष्ट्रीय विवाद का केंद्र बन गई है।

1. मार्क-48 टॉरपीडो: पानी के नीचे का काल

अमेरिकी नौसेना ने पुष्टि की है कि इस हमले में ‘मार्क-48’ का इस्तेमाल किया गया।

  • मारक क्षमता: लगभग 1700 किलोग्राम वजनी यह टॉरपीडो पानी के भीतर एक मिसाइल की तरह चलता है।
  • तकनीक: इसे पनडुब्बी से फायर किया जाता है और यह सीधे दुश्मन के जहाज के निचले हिस्से (Hull) को निशाना बनाता है, जिससे जहाज के बचने की संभावना शून्य हो जाती है।

2. क्या यह हमला ‘श्रीलंका की सीमा’ में था?

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी देश के तट से 12 नॉटिकल माइल्स तक ‘प्रादेशिक जल’ (Territorial Waters) होता है।

  • स्थान: हमला 19 नॉटिकल माइल्स दूर हुआ, जो श्रीलंका के ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र’ (EEZ) में आता है।
  • कानूनी पहलू: सीनियर एडवोकेट राहुल नारीचनिया के मुताबिक, EEZ में हमला होना प्रादेशिक जल जैसा नहीं है, लेकिन श्रीलंका इसके पर्यावरणीय नुकसान (तेल का फैलाव) के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध दर्ज करा सकता है।

3. भारत की बेबसी: क्यों नहीं बचा सका ‘देना’ को?

ईरानी विदेश मंत्री अराघची का दर्द है कि यह जहाज ‘भारतीय नौसेना के न्यौते’ पर आया था। लेकिन रियर एडमिरल सुधीर पिल्लै के अनुसार, भारत कानूनी रूप से बंधा हुआ था:

  • तटस्थता (Neutrality): अगर भारत ‘देना’ को बचाने के लिए अपना युद्धपोत भेजता, तो भारत खुद इस महायुद्ध का हिस्सा मान लिया जाता।
  • खुला समुद्र: चूंकि ‘देना’ भारतीय जलक्षेत्र या बंदरगाह से बाहर निकल चुका था, इसलिए अंतरराष्ट्रीय युद्ध नियमों के तहत वह अमेरिका के लिए एक ‘वैध सैन्य लक्ष्य’ (Legitimate Military Target) बन गया था।

4. गुजरात से कितनी दूर है जंग?

पेंटागन के नक्शों के अनुसार, अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ अरब सागर में तैनात है।

  • निकटता: यदि आप गुजरात के तट पर हैं, तो अमेरिकी बेड़े की मौजूदगी आपके काफी करीब है।
  • भारत का रुख: भारत ने स्पष्ट किया है कि उसने अमेरिकी नौसेना को अपने बंदरगाहों के इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी है, हालांकि अरब सागर में अमेरिकी जासूसी और निगरानी नेटवर्क पूरी तरह सक्रिय है।

5. “अमेरिका पछताएगा”: ईरान की चेतावनी

ईरानी विदेश मंत्री ने साफ कहा है कि अमेरिका ने बिना किसी चेतावनी के इस अपराध को अंजाम दिया है और उसे इसका पछतावा होगा। भारतीय नौसेना ने 5 मार्च को श्रीलंका के साथ मिलकर बचाव अभियान में मदद की है, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर भारत अब भी ‘संवाद और शांति’ की ही बात कर रहा है।


📊 हमले का डेटा शीट (Attack Summary)

विवरण जानकारी
हमले का समय 4 मार्च, सुबह 5:00 बजे
हथियार मार्क-48 टॉरपीडो (1700 kg)
लोकेशन गॉल (श्रीलंका) से 35 किमी दूर
कैजुअल्टी 84 शव बरामद, 130 में से 32 सुरक्षित
अमेरिकी बेस यूएसएस अब्राहम लिंकन (अरब सागर)

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