‘दालमंडी के 180 दुकानदारों का अस्तित्व दांव पर’; हाईकोर्ट की ‘यथास्थिति’ बनाम प्रशासन का बुलडोजर; क्या 2013 के कानून के तहत मिलेगा व्यापारियों को हक?
दालमंडी के 180 दुकानदारों की 'अस्तित्व' की लड़ाई अब इलाहाबाद हाईकोर्ट के गलियारों में। क्या प्रशासन ने 'यथास्थिति' (Status Quo) के आदेशों का उल्लंघन किया? 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और मुआवजे की मांग के बीच फंसी 'विकास की गंगा'। PNN24 की विशेष कानूनी रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
प्रयागराज/वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी के दालमंडी इलाके में 17.4 मीटर चौड़ीकरण परियोजना अब केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि एक जटिल कानूनी युद्ध बन चुकी है। हज़ारो दुकानदार और मकान मालिक इसकी ज़द में आ रहे है, वह अपनी आजीविका बचाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण में हैं।
1. हाईकोर्ट का ‘यथास्थिति’ (Status Quo) आदेश
दालमंडी के व्यापारियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 9 मई 2025 को एक महत्वपूर्ण आदेश दिया था, जो 2026 की मौजूदा कार्रवाइयों के दौरान भी चर्चा में है:
- कोर्ट का रुख: कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि बिना उचित ‘भूमि अधिग्रहण’ (Acquisition) के किसी भी निर्माण को ध्वस्त नहीं किया जा सकता।
- 189 भवनों का संरक्षण: याचिकाकर्ताओं के अनुसार, हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश से करीब 189 मकानों और दुकानों को संरक्षण मिला था। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि बिना मुआवजा दिए ध्वस्तीकरण कैसे संभव है?
2. 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की मांग
व्यापारियों और नागरिक अधिकार समूहों (जैसे APCR) का मुख्य आरोप है कि प्रशासन ‘राइट टू फेयर कम्पेन्सेशन एक्ट 2013′ का पालन नहीं कर रहा है।
- मांग: व्यापारियों का कहना है कि उन्हें केवल ‘पर्चा’ थमाकर दुकान खाली करने को न कहा जाए, बल्कि इस कानून के तहत उचित मुआवजा और पुनर्वास (Rehabilitation) की लिखित गारंटी दी जाए।
- आरोप: कई दुकानदारों ने दावा किया है कि हाईकोर्ट के ‘स्टे ऑर्डर’ को दरवाजों पर चस्पा करने के बावजूद, प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साये में ‘हथौड़ों’ से तोड़फोड़ जारी रखी।
3. प्रशासन का तर्क: “केवल अधिग्रहित भवनों पर कार्रवाई”
वहीं, वाराणसी जिला प्रशासन और PWD का रुख अलग है:
- सहमति से खरीद: प्रशासन का दावा है कि कुल 187 चिन्हित भवनों में से लगभग 25-30 मालिकों ने स्वेच्छा से रजिस्ट्री (Sale Deed) कर दी है और मुआवजा प्राप्त कर लिया है।
- अवैध निर्माण: VDA का तर्क है कि 12 से अधिक भवन ऐसे हैं जो बिना नक्शे के अवैध रूप से बने हैं, जिन पर कोर्ट का आदेश लागू नहीं होता।
4. किराएदारों का ‘जीरो राइट’ संकट
हाल ही में मार्च 2026 में हाईकोर्ट की एक टिप्पणी ने किराएदारों की चिंता बढ़ा दी है। कोर्ट ने कहा कि “परिसर खाली होते ही किराएदार के सभी विधिक अधिकार समाप्त हो जाते हैं।” इसने उन सैकड़ों दुकानदारों को अधर में लटका दिया है जो सालों से ‘पगड़ी’ देकर किराए पर दुकान चला रहे थे।
📊 दालमंडी कानूनी डायरी (Quick Facts)
| विवरण | सांख्यिकी / स्थिति |
| कुल चिन्हित भवन | 187-189 (लगभग) |
| हाईकोर्ट का मुख्य आदेश | बिना अधिग्रहण के ध्वस्तीकरण पर रोक (Status Quo) |
| अधिग्रहण का आधार | आपसी सहमति या 2013 का भूमि अधिग्रहण कानून |
| प्रशासन का दावा | लगभग 25-30 भवनों की रजिस्ट्री पूरी |
| व्यापारियों का पक्ष | ‘जबरन बेदखली’ और ‘अधूरा मुआवजा’ |
📌 PNN24 विश्लेषण:
दालमंडी की यह कानूनी लड़ाई अब एक मिसाल बनने जा रही है। अगर प्रशासन बिना पूर्ण अधिग्रहण के निर्माण गिराता है, तो यह ‘न्यायालय की अवमानना’ (Contempt of Court) का मामला बन सकता है। व्यापारियों की मांग जायज है— विकास हो, लेकिन किसी के घर का दीया बुझाकर नहीं। यही नहीं इस दरमियान 31 वादकारियो ने वाराणसी के विभिन्न अधिकारियो के खिलाफ हाई कोर्ट में वाद दाखिल कर रखा है, जिसमे अदालत ने सभी से शपथपत्र मांगे है, ख़ास तौर पर अधिकारियों के लिए यह वाद सरदर्द साबित हो सकता है जब अदालत में जर्जर और अति जर्जर भवनों जैसे मुद्दे उठेगे।












