VDA का ‘सिलेक्टिव बुल्डोज़र’: दालमंडी में नियम और भेलूपुर में ‘संरक्षण’? सील इमारत पर तन गया आलीशान होटल “शिवाय”, पार्किंग के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति

VDA का दोहरा मापदंड: दालमंडी में बुल्डोज़र, भेलूपुर के 'होटल शिवाय' पर मेहरबानी? सील बिल्डिंग पर कैसे खड़ा हो गया आलीशान होटल? पार्किंग के नाम पर सड़क का अतिक्रमण और कागजी घोड़ों की हकीकत।

तारिक आज़मी 

वाराणसी (PNN24 News): वाराणसी विकास प्राधिकरण (VDA) की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक तरफ प्राधिकरण दशकों पुराने शमन नोटिस (DO) लेकर दालमंडी जैसे इलाकों में बुल्डोज़र चलाने की ‘तमन्ना’ पाले रहता है, वहीं दूसरी तरफ भेलूपुर ज़ोन में नियमों की धज्जियाँ उड़ाते अवैध निर्माणों पर ‘कृपा दृष्टि’ बनी हुई है। निष्पक्षता की बातें करने वाला प्रशासन क्या वाकई नाम और इलाके देखकर कार्रवाई करता है?

1. बनारस कोठी बनाम होटल शिवाय: दो तरफा कानून?

हाल ही में ‘बनारस कोठी’ पर चले बुल्डोज़र ने काफी सुर्खियाँ बटोरीं। खुर्शीद मियां की गुहार अनसुनी कर दी गई और होटल ढहा दिया गया। लेकिन इसके ठीक उलट, भेलूपुर ज़ोन के क्रीमकुण्ड (भेलूपुर-अग्रवाल रेडियो) मार्ग पर स्थित भवन संख्या B-10/50-51 की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। वीडीए की फाइलों में यह भवन ‘सील’ दर्ज है, लेकिन धरातल पर यहाँ ‘होटल शिवाय’ के नाम से एक आलीशान इमारत सीना ताने खड़ी है।

2. पार्किंग के नाम पर ‘मजाक’

कागजों पर इस भवन के बेसमेंट में पार्किंग दिखाई गई है। लेकिन हकीकत यह है कि उस बेसमेंट में वीडीए के वीसी साहब की गाड़ी तो क्या, एक साइकिल पार्क करना भी दूभर है।

  • सड़क ही पार्किंग: स्थानीय पुलिस के ‘वरदहस्त’ और वीडीए की चुप्पी का नतीजा यह है कि होटल में आने वाले वाहनों के लिए पूरी सड़क ही पार्किंग स्थल बन गई है।
  • नागरिकों का जीना मुहाल: होटल की रसोई की चिमनी नियमों को ताक पर रखकर बाहर गली में खोल दी गई है, जिससे स्थानीय निवासियों का सांस लेना दूभर हो गया है।

3. अग्निशमन विभाग की NOC पर सवाल

एक सील बिल्डिंग पर आलीशान होटल का संचालन न केवल वीडीए बल्कि अग्निशमन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लगाता है। बिना उचित पार्किंग और सुरक्षा मानकों के आखिर एनओसी (NOC) कैसे जारी कर दी गई? यह जाँच का विषय है।

4. क्या नाम देखकर चलता है बुल्डोज़र?

क्षेत्रीय जनता के बीच यह चर्चा आम है कि वीडीए का हथौड़ा सिर्फ ‘उर्दू नाम’ वाले मालिकों या खास इलाकों तक ही सीमित क्यों है? दालमंडी में दशकों पुराने नोटिस निकाल लिए जाते हैं, लेकिन भेलूपुर की मुख्य सड़क पर सील बिल्डिंग पर चल रहे होटल को देखने के लिए वीडीए की आँखें कब खुलेंगी, यह बड़ा सवाल है।

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