महायुद्ध के बीच ‘शांति की पुकार’: पोप, दलाई लामा और ग्रैंड इमाम एक साथ आए; दुनिया के बड़े धर्मगुरुओं ने कहा— “मज़हब नहीं, इंसानियत पर है हमला”

मिडिल ईस्ट में जारी खूनी संघर्ष और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़े महायुद्ध ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। जहाँ मिसाइलें और ड्रोन तबाही मचा रहे हैं, वहीं दुनिया के शीर्ष आध्यात्मिक और धार्मिक गुरुओं ने इस 'हिंसा के दुष्चक्र' को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व मोर्चा खोल दिया है।

ईदुल अमीन

PNN24 News: मिडिल ईस्ट में जारी खूनी संघर्ष और ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच छिड़े महायुद्ध ने पूरी दुनिया को दहला दिया है। जहाँ मिसाइलें और ड्रोन तबाही मचा रहे हैं, वहीं दुनिया के शीर्ष आध्यात्मिक और धार्मिक गुरुओं ने इस ‘हिंसा के दुष्चक्र’ को रोकने के लिए एक अभूतपूर्व मोर्चा खोल दिया है।

1. पोप लियो: “नैतिक जिम्मेदारी समझें नेता” वेटिकन से जारी अपने संदेश में पोप लियो ने कहा कि स्थिरता धमकियों से नहीं बल्कि ‘जिम्मेदार संवाद’ से आती है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभी नहीं रुके, तो यह युद्ध एक ऐसी “अपूरणीय खाई” बन जाएगा जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं होगी।

2. दलाई लामा: “करुणा ही एकमात्र विकल्प” तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने भी इस संकट पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने अपने संदेश में कहा:

“युद्ध कभी शांति नहीं ला सकता। यह केवल घृणा और विनाश को जन्म देता है। २१वीं सदी संवाद की सदी होनी चाहिए। मैं सभी पक्षों से प्रार्थना करता हूँ कि वे मासूमों की जान बचाने के लिए हथियारों को नीचे रखें और करुणा का मार्ग अपनाएं।”

3. अल-अजहर के ग्रैंड इमाम: “प्रभुसत्ता का उल्लंघन और अन्याय” काहिरा स्थित सुन्नी इस्लाम के सबसे बड़े केंद्र अल-अजहर के ग्रैंड इमाम अहमद अल-तैयब ने इज़रायली हमलों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों और बच्चों का खून बहाना किसी भी धर्म में स्वीकार्य नहीं है। इमाम ने संयुक्त राष्ट्र से अपील की कि वह ‘अराजकता और अहंकार’ को रोकने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करे।

4. भारत: लखनऊ की सड़कों पर विरोध और दुआएं युद्ध की आंच भारत तक भी पहुंच चुकी है। लखनऊ के ऐतिहासिक इमामबाड़े में शिया समुदाय और अन्य धर्मगुरुओं ने युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन किया और शांति की प्रार्थना की। धर्मगुरुओं ने इसे ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ करार दिया है।

इतिहास में ऐसा कम ही होता है जब दुनिया के सभी प्रमुख धर्मगुरु एक ही स्वर में किसी राजनीतिक संकट पर इतने मुखर हों। यह एकता दर्शाती है कि स्थिति कितनी गंभीर है। जब राजनीति और कूटनीति विफल हो रही है, तब इन आध्यात्मिक आवाज़ों का नैतिक दबाव ही शायद दुनिया को विनाश से बचा सकता है।

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