‘भारत-नेपाल सीमा पर “सन्नाटा”: नेपाल के नए भंसार नियम से सीमावर्ती बाजार हुए “लॉकडाउन” जैसे; 100 रुपये से ऊपर के सामान पर टैक्स ने छीनी व्यापारियों की बोहनी!’
नेपाल के '100 रुपये वाले' नियम ने तोड़ी सीमावर्ती भारतीय बाजारों की कमर! गौरीफंटा के बनगंवा बाजार में पसरा सन्नाटा, व्यापारियों के सामने रोज़ी-रोटी और पलायन का संकट। नेपाल सरकार के सख्त सीमा शुल्क (भंसार) से कतरा रहे नेपाली ग्राहक। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

फारुख हुसैन
गौरीफंटा-खीरी (PNN24 News): भारत और नेपाल की सदियों पुरानी ‘रोटी-बेटी’ के रिश्तों के बीच अब ‘भंसार’ (सीमा शुल्क) की दीवार खड़ी हो गई है। नेपाल सरकार द्वारा लागू किए गए नए और सख्त सीमा शुल्क नियमों ने लखीमपुर खीरी ज़िले से सटे इंडो-नेपाल बॉर्डर के बाजारों की रौनक छीन ली है। कोतवाली गौरीफंटा के बनगंवा बाजार सहित कई अन्य सीमावर्ती बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है और व्यापारी भुखमरी की कगार पर पहुँच गए हैं।
1. 100 रुपये का नियम और व्यापार की कमर
संकट की मुख्य वजह नेपाल सरकार का वह हालिया फैसला है, जिसके तहत अब भारतीय बाजारों से मात्र 100 रुपये से अधिक का सामान नेपाल ले जाने पर ‘भंसार’ यानी सीमा शुल्क देना अनिवार्य कर दिया गया है।
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असर: पहले नेपाली ग्राहक भारतीय बाजारों से नमक, तेल, कपड़े और गृहस्थी का सामान भारी मात्रा में ले जाते थे। अब छोटे-मोटे सामान पर भी भारी टैक्स और घंटों की जांच प्रक्रिया के डर से ग्राहकों ने बॉर्डर पार करना बंद कर दिया है।
2. बनगंवा बाजार: 90% धंधा पूरी तरह ठप
बनगंवा बाजार, जो कभी नेपाली ग्राहकों से गुलज़ार रहता था, आज सूना पड़ा है। यहाँ के व्यापार का 90 प्रतिशत हिस्सा नेपाल से आने वाले ग्राहकों पर टिका था। दुकानदारों का कहना है कि सुबह से शाम तक बोहनी (दिन की पहली बिक्री) तक नहीं हो रही है। बिक्री ठप होने के कारण दुकान का किराया, बिजली का बिल और कर्मचारियों का खर्च निकालना अब व्यापारियों के वश से बाहर हो गया है।
3. पलायन की ओर मजबूर व्यापारी
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि नेपाल सरकार ने इस नियम में ढील नहीं दी, तो उनके पास व्यापार बंद कर पलायन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। व्यापारियों ने दोनों देशों की सरकारों से इस गंभीर आर्थिक समस्या का कूटनीतिक समाधान निकालने की गुहार लगाई है ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों का अर्थचक्र फिर से घूम सके।













