प्रयागराज: स्टेशन के बाहर स्थित ऐतिहासिक मस्जिद को मिला ध्वस्तीकरण नोटिस, वकीलों ने राष्ट्रपति से लगाई गुहार, दोषी अधिकारियो पर कार्यवाई की मांग

प्रयागराज जंक्शन के बाहर स्थित ब्रिटिश कालीन मस्जिद को मिले ध्वस्तीकरण नोटिस के खिलाफ अधिवक्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर इसे ऐतिहासिक धरोहर बताते हुए बचाने की मांग की गई है।

तारिक़ खान

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक मस्जिद को दिए गए ध्वस्तीकरण (Demolition) नोटिस ने कानूनी और सामाजिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। इस नोटिस के विरोध में अधिवक्ताओं का एक बड़ा समूह लामबंद हो गया है और जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है

वक्फ बोर्ड में दर्ज है मस्जिद की पहचान

अधिवक्ताओं द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में इस बात पर जोर दिया गया है कि यह मस्जिद कोई अवैध निर्माण नहीं है। यह वर्ष 1950 से वक्फ बोर्ड में क्रम संख्या 161 पर विधिवत दर्ज है। अधिवक्ताओं का कहना है कि वक्फ संपत्ति के रूप में इसकी वैधानिक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है, ऐसे में इसे गिराने का नोटिस देना न्यायसंगत नहीं है।

मेजर शाहनवाज खान से जुड़ा है इतिहास

इस मस्जिद का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और राष्ट्रीय भी है। बताया गया है कि इस मस्जिद का निर्माण और विकास महान स्वतंत्रता सेनानी और आज़ाद हिंद फौज (INA) के अधिकारी मेजर शाहनवाज खान के संरक्षण में हुआ था। मेजर शाहनवाज खान स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में 1952 से 1964 तक रेल मंत्रालय में उप मंत्री भी रहे थे। उनके नाम से जुड़ी होने के कारण यह मस्जिद भारतीय गौरव और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत का प्रतीक मानी जाती है।

अधिवक्ताओं की मुख्य मांगें

  • अधिवक्ताओं ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में निम्नलिखित चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
  • नोटिस की निरस्तगी: ध्वस्तीकरण के नोटिस को तुरंत वापस लिया जाए।
  • धरोहर संरक्षण: मस्जिद को ऐतिहासिक धरोहर घोषित कर इसे संरक्षित किया जाए।
  • ​अधिकारों की सुरक्षा: वक्फ संपत्ति के रूप में इसके कानूनी अधिकारों की रक्षा हो।
  • जांच की मांग: इस मामले की निष्पक्ष जांच कर गैर-कानूनी नोटिस जारी करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।

जन-आक्रोश और चेतावनी

अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी, तो वे बड़े स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ने और जन आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। मस्जिद में ब्रिटिश काल से ही पाँचों वक्त की नमाज अदा की जा रही है, जिससे स्थानीय मुस्लिम समाज और आम जनता की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

​इस नोटिस के बाद से प्रयागराज जंक्शन के आसपास का माहौल गरमाया हुआ है और लोग प्रशासन के इस कदम को विरासत पर हमला मान रहे हैं।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *