‘शिक्षा परिसरों में “जातिगत भेदभाव” पर घमासान: पलिया में बरसी इंकलाबी नौजवान सभा; सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, कहा— “समानता की ओर बढ़ते कदमों को पीछे न खींचे कोर्ट”!’
पलिया-कलां (खीरी): 'यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026' पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के खिलाफ इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने खोला मोर्चा। राष्ट्रपति के नाम नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन। रोहित वेमुला और दर्शन सोलंकी जैसे छात्रों की खुदकुशी का हवाला देकर भेदभाव रोकने वाले कानून को तुरंत लागू करने की मांग। PNN24 की विशेष क्षेत्रीय रिपोर्ट।

फारुख हुसैन
पलिया-कलां, लखीमपुर खीरी (PNN24 News): उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते जातिगत और लैंगिक भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए ‘यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026’ पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक ने छात्रों और युवा संगठनों में आक्रोश पैदा कर दिया है। शनिवार को इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के कार्यकर्ताओं ने पलिया में जोरदार प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपकर अपनी मांगें बुलंद कीं।
1. भेदभाव के मामलों में 118% की वृद्धि: आरवाईए का दावा
संगठन के पदाधिकारियों ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि विश्वविद्यालयों में भेदभाव के मामलों में 118 प्रतिशत की भयावह वृद्धि हुई है।
- छात्रों की याद: ज्ञापन में रोहित वेमुला, दर्शन सोलंकी और पायल तडवी जैसे होनहार छात्रों का ज़िक्र किया गया, जिन्हें जातिगत उत्पीड़न के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी।
- तर्क: कार्यकर्ताओं ने कहा कि केवल ‘दुरुपयोग की संभावना’ के आधार पर किसी सामाजिक सुरक्षा के कानून (रेगुलेशन) को रोकना न्यायसंगत नहीं है।
2. पारदर्शी कमेटियों की मांग
आरवाईए ने इस रेगुलेशन को प्रभावी बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं:
- कमेटियों में निर्वाचित छात्रों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों को जगह मिले।
- कमेटी का अध्यक्ष वंचित समाज (SC/ST/OBC) से ही नियुक्त किया जाए, ताकि सुनवाई बिना किसी पक्षपात के हो सके।
3. नायब तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
उपजिलाधिकारी डॉ. अवनीश कुमार की अनुपस्थिति में आरवाईए के प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता सुनिश्चित करने वाले नियमों को बहाल नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज़ किया जाएगा।











