‘काशी में सेल्फी बनी काल: क्रूज पर वीडियो बनाते समय गंगा में गिरे भाजपा नेता; 7 घंटे के रेस्क्यू के बाद मिला हर्षवर्धन का शव!’
वाराणसी: ग्रेटर नोएडा के भाजपा नेता हर्षवर्धन ठाकुर की गंगा में डूबने से मौत। क्रूज पर सेल्फी लेते समय पैर फिसलने से हुआ हादसा। मंगला आरती के दर्शन से पहले ही परिवार में छाया मातम। एनडीआरएफ ने 7 घंटे के रेस्क्यू के बाद निकाला शव। PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

ईदुल अमीन
वाराणसी (PNN24 News): धर्मनगरी काशी में गंगा के घाटों की खूबसूरती को कैमरे में कैद करने का शौक एक युवा राजनेता के लिए जानलेवा साबित हुआ। ग्रेटर नोएडा से बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने आए भाजपा नेता हर्षवर्धन ठाकुर की गंगा में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई।
1. मंगला आरती से पहले हुआ हादसा
ग्रेटर नोएडा निवासी और भारतीय श्रमिक कामगार कर्मचारी महासंघ के प्रदेश मंत्री हर्षवर्धन ठाकुर (27) अपने पांच दोस्तों के साथ बुधवार को वाराणसी पहुंचे थे। गुरुवार तड़के 3 बजे उन्हें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में मंगला आरती में शामिल होना था। आरती से पहले, रात करीब 12:30 बजे मान मंदिर घाट पर टहलते समय वह एक क्रूज पर चढ़कर सेल्फी और वीडियो बनाने लगे, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से वह गंगा में गिर पड़े।
2. संभलने का नहीं मिला मौका
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के वक्त हर्षवर्धन के दोनों हाथों में मोबाइल फोन थे, जिससे उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला। एक क्रूज से दूसरे क्रूज पर जाने की कोशिश के दौरान उनका पैर फिसल गया और वह उफनती नदी की लहरों में समा गए। रात का अंधेरा और तेज बहाव होने के कारण स्थानीय गोताखोर उन्हें बचा नहीं सके।
3. एनडीआरएफ का महा-रेस्क्यू ऑपरेशन
हादसे की सूचना मिलते ही दशाश्वमेध पुलिस और जल पुलिस सक्रिय हुई। रात भर चले तलाशी अभियान के बाद गुरुवार सुबह 6 बजे एनडीआरएफ (NDRF) की टीम ने मोर्चा संभाला। लगभग सात घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुबह 7:30 बजे हर्षवर्धन का शव बरामद हुआ। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
4. परिवार में कोहराम
हर्षवर्धन ठाकुर राजनीति के साथ-साथ प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य भी करते थे। उनके पिता संदीप सिंह दिल्ली पुलिस में तैनात हैं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया है, वहीं उनके साथ आए दोस्त गहरे सदमे में हैं।
📝 विशेष कॉलम: मोरबत्तियाँ (लेखक: तारिक आज़मी)

काका का नज़रिया: “बबुआ, ये मोबाइल और सेल्फी का शौक अब जानलेवा नशा बनता जा रहा है; घाट की खूबसूरती आँखों में बसाने की चीज़ है, कैमरे में कैद करने के चक्कर में अपनी जान जोखिम में डालना कहाँ की समझदारी है?”
आज इस दुःखद घटना पर काका ने गहरी चिंता जताई।
काका बोले: “बबुआ, काशी के घाट जितने सुंदर हैं, गंगा की लहरें उतनी ही गहरी और तेज़ हैं। 27 साल का नौजवान लड़का, जिसका पूरा भविष्य सामने था, एक सेल्फी के चक्कर में काल के गाल में समा गया। दोनों हाथों में मोबाइल लेकर क्रूज पर कलाबाजी दिखाना मौत को दावत देने जैसा ही है। अब मंगला आरती के बजाय घर में मातम का शोर होगा।”
मैंने पूछा— “काका, क्या घाटों पर सुरक्षा और चेतावनी के बोर्ड नहीं होने चाहिए?”
काका का जवाब: “बबुआ, प्रशासन तो बोर्ड लगाएगा ही, पर खुद की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? काशी की अड़ियों पर हम यही कहते हैं— ‘साहब, गंगा मैया का आशीर्वाद लेने आइये, उनके साथ खिलवाड़ करने नहीं’। ये हादसा उन तमाम युवाओं के लिए एक सबक है जो रील और सेल्फी के लिए सुरक्षा नियमों को ताक पर रख देते हैं।”










