‘भोपाल में बड़ा सियासी व शैक्षणिक उलटफेर: बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का फैसला; अब कहलाएगी “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय”, बैठक में हुआ तीखा विरोध!’
भोपाल: बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का बड़ा फैसला, अब 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' के नाम से जाना जाएगा संस्थान। कार्य परिषद की बैठक में प्रस्ताव को मिली मंजूरी। राजा भोज की ऐतिहासिक विरासत के सम्मान में लिया गया निर्णय, जिसका अरबी-पर्शियन विभाग की प्रमुख डॉ. ताहिरा अब्बासी ने किया विरोध। अंतिम मुहर के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा प्रस्ताव। पढ़ें PNN24 की विशेष रिपोर्ट।

आदिल अहमद
भोपाल (PNN24 News): मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने का एक बेहद बड़ा और दूरगामी फैसला लिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से तैयार किए गए नए प्रस्ताव के मुताबिक, अब इस शिक्षण संस्थान का नया नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ होगा। बुधवार को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद (Executive Council) की अहम बैठक में यह फैसला लिया गया। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर बैठक के भीतर ही तीखे विरोध के स्वर भी गूंजे, लेकिन बहुमत और प्रशासनिक सहमति के बाद इसे मंजूरी दे दी गई।
👑 राजा भोज की विरासत और साहित्य के योगदान का दिया हवाला
विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक में जब यह प्रस्ताव पटल पर रखा गया, तो इसके पीछे मालवा के महान शासक राजा भोज की ऐतिहासिक विरासत का तर्क दिया गया।
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साहित्य और संस्कृति का सम्मान: प्रस्ताव में कहा गया कि राजा भोज का साहित्य, स्थापत्य, विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान रहा है। भोपाल (भोजपाल) नगरी की स्थापना और पहचान उनसे जुड़ी है, इसलिए विश्वविद्यालय का नाम उनके और वाग्देवी (मां सरस्वती) के नाम पर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ किया जाना चाहिए।
🛑 ‘स्वतंत्रता सेनानी का अपमान’— डॉ. ताहिरा अब्बासी ने किया कड़ा विरोध
इस नाम परिवर्तन के प्रस्ताव का बैठक में मौजूद कार्य परिषद सदस्य और विश्वविद्यालय की अरबी-पर्शियन विभाग की प्रमुख डॉक्टर ताहिरा अब्बासी ने पुरजोर विरोध किया।
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अब्बासी का तर्क: डॉ. ताहिरा अब्बासी ने दलील दी कि मौलाना बरकतउल्ला भोपाली खुद देश के एक महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी रहे हैं। भोपाल की धरती से निकले ऐसे महान राष्ट्रभक्त के नाम पर बने विश्वविद्यालय का नाम बदलना इतिहास और उनके योगदान की अनदेखी करना होगा। इसलिए इस नाम को यथावत रखा जाए।
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प्रस्ताव पास: हालांकि, इस विरोध के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने नाम बदलने से जुड़े इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को बहुमत के आधार पर अपनी मंजूरी दे दी।
🏛️ अभी राज्य सरकार की अंतिम मुहर लगना बाकी
यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉक्टर एबी सिंह ने इस संबंध में पत्रकारों को महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्य परिषद ने नाम बदलने का निर्णय ले लिया है। हालांकि, इसे अंतिम रूप से धरातल पर लागू होने के लिए अभी राज्य सरकार की मंजूरी और अन्य वैधानिक (कानूनी) प्रक्रियाओं की औपचारिकताओं को पूरा किया जाना बाकी है। रजिस्ट्रार के मुताबिक, कार्य परिषद के इस फैसले का आधिकारिक प्रस्ताव जल्द ही अंतिम स्वीकृति के लिए मध्य प्रदेश शासन के पास भेजा जा रहा है।
📜 1970 से अब तक: क्या है इस यूनिवर्सिटी का इतिहास?
- भोपाल विश्वविद्यालय के रूप में जन्म: इस विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1970 में मूल रूप से ‘भोपाल विश्वविद्यालय’ के रूप में की गई थी।
- 1988 में मिला नया नाम: इसके बाद साल 1988 में तत्कालीन सरकार ने देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी चिंतक मौलाना बरकतउल्ला भोपाली के सम्मान में इसका नाम बदलकर ‘बरकतउल्ला विश्वविद्यालय’ कर दिया था।
📌 कौन थे मौलाना बरकतउल्ला भोपाली?
मौलाना मोहम्मद बरकतउल्ला भोपाली (1854–1927) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उन अग्रिम पंक्ति के क्रांतिकारियों में शामिल थे, जिन्होंने वैश्विक पटल पर भारत की आजादी की आवाज बुलंद की थी:
- पहली निर्वासित सरकार के पीएम: वे भारत की पहली निर्वासित सरकार (Government-in-exile) के प्रधानमंत्री थे।
- अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अभियान: भोपाल में जन्मे मौलाना बरकतउल्ला ने विदेशों में रहकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जनमत तैयार किया।
- गदर आंदोलन के नायक: वे ऐतिहासिक ‘गदर आंदोलन’ के प्रमुख स्तंभों में से एक थे। उन्होंने जापान, अमेरिका, जर्मनी और अफगानिस्तान जैसे देशों की यात्रा कर अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ भारतीयों को लामबंद किया था।
शिक्षा के इस बड़े केंद्र का नाम बदले जाने के बाद अब मध्य प्रदेश में एक बार फिर ‘नामकरण बनाम इतिहास’ की राजनीतिक बहस छिड़ना तय माना जा रहा है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के आगामी कदम पर टिकी हैं।










