‘दिल्ली अग्निकांड: मालवीय नगर के होटल में “मौत का ताला”, तीसरी मंजिल से कूदने लगे लोग; जब लपटों के बीच फरिश्ते बने हौज़ रानी के मुस्लिम युवा, CPR देकर लौटाईं सांसें!’

नई दिल्ली: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज़ रानी में 'फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' होटल में लगी भीषण आग में 21 की मौत, 35 घायल। दर्दनाक हादसे के बीच देवदूत बनकर उभरे हौज़ रानी के मुस्लिम युवक। अफजल, शाहरुख, वसीम और शोएब ने अपनी जान पर खेलकर 10 से ज्यादा लोगों को दिया सीपीआर, बचाई जान। बीजेपी विधायक सतीश उपाध्याय ने भी किया सलाम। फायर ब्रिगेड की लापरवाही पर भड़के लोग। पढ़ें PNN24 की विशेष खोजी ग्राउंड रिपोर्ट।

तारिक आज़मी

नई दिल्ली (PNN24 News): दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित हौज रानी इलाके में एक पांच मंजिला होटल ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’ में अचानक लगी भीषण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया。 आग की लपटों और चारों तरफ फैले घने काले धुएं के बीच होटल में चीख-पुकार मची हुई थी और पहली से लेकर पांचवीं मंजिल पर 40 से अधिक लोग अपनी जिंदगी की आखिरी सांसें गिन रहे थे। इस भीषण हादसे में 21 लोगों की जान चली गई, जिनमें 11 विदेशी मेहमान भी शामिल हैं। वहीं 35 लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिनका इलाज जारी है और 19 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

इस महा-त्रासदी के बीच अगर स्थानीय लोग और जांबाज बीट पुलिसकर्मी देवदूत बनकर सामने न आते, तो यह मौत का आंकड़ा सौ के पार जा सकता था।

🔓 छत पर लटका था ‘मौत का ताला’, शटर तोड़कर घुसे स्थानीय लड़के

होटल में आने-जाने का केवल एक ही मुख्य संकरा रास्ता था, जहां ग्राउंड फ्लोर की लॉबी में ही भीषण आग लग चुकी थी।

  • सीढ़ियों पर दम घुटने लगा: जान बचाने के लिए लोग ऊपर छत की तरफ भागे। स्थानीय निवासी अनीस ने बताया कि होटल की छत से पीछे की ओर एक लोहे की सीढ़ी उतरती थी, लेकिन उस दरवाजे पर होटल प्रबंधन का एक ‘मौत का ताला’ लटका हुआ था。 ताला बंद होने के कारण लोग बाहर नहीं भाग सके और जहरीले धुएं के कारण बेहोश होकर सीढ़ियों और लॉबी में ही गिरने लगे।
  • शटर तोड़कर बनाई राह: जब मुख्य गेट से आग की लपटों के कारण अंदर जाना मुमकिन नहीं हुआ, तो हौज़ रानी के साहसी युवकों ने इमारत की बगल वाली संकरी गली के एक शटर को हथौड़ों से तोड़ा और चादरों में लपेट-लपेटकर अचेत पड़े लोगों को बाहर खींचना शुरू किया।

🛏️ दुकान के सारे गद्दे गली में बिछाए; तीसरी मंजिल से कूदी मां और बच्चा

होटल के ठीक सामने पिछले 45 वर्षों से रजाई-गद्दों की दुकान चलाने वाले रियाजुद्दीन मंसूरी ने जैसे ही लोगों की चीख-पुकार सुनी, उन्होंने बिना एक सेकंड गंवाए इंसानियत की बड़ी मिसाल पेश की।

  • बिछा दिए गद्दे: रियाजुद्दीन ने अपनी दुकान के सारे नए गद्दे निकालकर होटल के सामने और बगल की कंक्रीट वाली गली में बिछा दिए।
  • बाल-बाल बची जान: इसी बीच तीसरी मंजिल की खिड़की का कांच तोड़कर एक बेबस मां अपने छोटे बच्चे को गोद में लेकर नीचे कूद गई। नीचे गद्दे बिछे होने के कारण मां-बच्चे को मामूली चोटें आईं और उनकी जान बच गई, दोनों का इलाज मैक्स अस्पताल में चल रहा है। इसी तरह चौथी मंजिल से भी एक दंपति पाइप से फिसलकर सीधे गद्दों पर गिरे। रियाजुद्दीन की इस सूझबूझ से 8 से 10 लोगों की जिंदगी सुरक्षित बच गई।

🫁 अचेत लोगों के लिए संजीवनी बने अफजल, वसीम और शोएब; दिया CPR

धुएं के कारण दम घुटने से जिन लोगों की सांसें थम चुकी थीं और जो बेहोश हो चुके थे, उनके लिए स्थानीय मुस्लिम युवक मसीहा बन गए।

  • 10 से अधिक लोगों को दिया CPR: स्थानीय युवक अफजल, मोहम्मद शाहरुख, मोहम्मद अनीस, मोहम्मद आमिर, शोएब, इकरार और मोहम्मद वसीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर आग के बीच से 10 से अधिक लोगों को बाहर निकाला।
  • 300 मीटर तक पंप करते हुए भागे: इन युवकों ने इमरजेंसी मेडिकल प्रक्रिया अपनाते हुए अचेत पड़े पीड़ितों को तुरंत छाती दबाकर कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) देना शुरू किया。 एक विदेशी नागरिक की सांसें पूरी तरह थम चुकी थीं, जिसे दमकल कर्मी बाहर लाए थे। शोएब, वसीम और इकरार ने बारी-बारी से उसे लगातार सीपीआर देते हुए करीब 300 मीटर दूर स्थित मैक्स अस्पताल तक पैदल ही दौड़ लगा दी और उसकी सांसें वापस लौटा दीं।
  • संजय और बीट ऑफिसर मनोज की जांबाजी: वहीं, लक्ष्मी नगर निवासी क्रॉकरी दुकानदार संजय गोयल ने मालवीय नगर थाने के बीट अफसर मनोज और दिनेश कुमार के साथ मिलकर हथौड़े से शीशे तोड़े और ऊपरी मंजिलों में फंसे 4 महिलाओं और 12 पुरुषों समेत 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

🤝 विधायक सतीश उपाध्याय बोले— “इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म”

इस बहादुरी को देखकर मालवीय नगर से भाजपा विधायक सतीश उपाध्याय ने सोशल मीडिया पर इन जांबाज मुस्लिम युवकों और दिल्ली पुलिस के जवानों की जमकर तारीफ की। उन्होंने लिखा, “इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। इन लोगों ने संकट की घड़ी में मजहब से ऊपर उठकर इंसानियत को सबसे ऊपर रखा।” इसके साथ ही उन्होंने मोर्चा संभालने वाले दिल्ली पुलिस के 5 जांबाज पुलिसकर्मियों— हेड कांस्टेबल दिनेश, करतार सिंह, देशराज, अजय और मीणा की बहादुरी को भी सेल्यूट किया।

⏱️ महज 1.5 किलोमीटर की दूरी… आधे घंटे की देरी! फायर ब्रिगेड पर फूटा गुस्सा

इस दर्दनाक हादसे के बाद दिल्ली फायर सर्विस (Fire Department) के रिस्पांस टाइम को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।

  • 14 बार किया फोन: स्थानीय निवासी मोहम्मद वसीम ने बताया कि सुबह ठीक 8:48 बजे पुलिस और फायर ब्रिगेड दोनों को पहली सूचना दे दी गई थी। इसके बाद उन्होंने खुद फायर ऑफिसर को लगातार 14 बार फोन किया, लेकिन हर बार ‘बस आ रहे हैं’ का आश्वासन ही मिलता रहा।
  • लेट लतीफी ने ली जान: मालवीय नगर थाने के ठीक बगल में फायर स्टेशन स्थित है, जिसकी घटनास्थल (हौज रानी) से कुल दूरी महज 1.5 किलोमीटर है। इसके बावजूद दमकल की गाड़ियां लगभग 42 मिनट की देरी से सुबह 9:30 बजे मौके पर पहुंचीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर फायर ब्रिगेड आधे घंटे पहले आ जाती, तो शायद कई और जानें बचाई जा सकती थीं。

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *