‘शिवसेना स्थापना दिवस: बगावत के बीच गरजे उद्धव ठाकरे— “अगर कार्यकर्ताओं को मंजूर हो तो मैं पद छोड़ने को तैयार”; कांग्रेस को बीजेपी से बेहतर बताया, विलय की खबरें खारिज’
शिवसेना स्थापना दिवस 2026: सांसदों की बगावत के बीच उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान— "गद्दारों का हिसाब मांगें कार्यकर्ता, मैं पद छोड़ने को तैयार।" कांग्रेस की तारीफ करते हुए बीजेपी को बताया 'वन पार्टी, नो इलेक्शन' वाली ताकत; शिवसेना (UBT) के कांग्रेस में विलय की अटकलों को सिरे से नकारा। पढ़ें PNN24 की विशेष राजनीतिक रिपोर्ट।

महविश कुरैशी
मुंबई (PNN24 News): शिवसेना (UBT) के संसदीय दल में मची भारी खलबली और सांसदों के पाला बदलने की खबरों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने पार्टी के 60वें स्थापना दिवस (19 जून, शुक्रवार) के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में विरोधियों को करारा जवाब दिया है। मुंबई में शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने न सिर्फ बीजेपी के ‘ऑपरेशन लोटस’ पर तीखा पलटवार किया, बल्कि बागी नेताओं को ‘गद्दार’ बताते हुए कार्यकर्ताओं से उनका हिसाब मांगने का खुला आह्वान किया।
🥊 “गद्दारों की पिटाई होनी चाहिए”— बाल ठाकरे के पुराने भाषण का जिक्र
इंडिया टुडे के पत्रकार मुस्तफा शेख की रिपोर्ट के अनुसार, स्थापना दिवस समारोह में उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहा कि अब उन्हें किसी केंद्रीय आदेश का इंतजार करने की जरूरत नहीं है।
- पुराना भाषण वायरल: उद्धव ने बाला साहेब ठाकरे के उस पुराने और चर्चित भाषण की याद दिलाई, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है, जिसमें बाल ठाकरे ने कहा था कि पार्टी से गद्दारी करने वालों की सरेराह पिटाई की जानी चाहिए।
- बीजेपी को चेतावनी: उद्धव ने तंज कसते हुए कहा, “अगर बीजेपी इसी तरह हमारे नेताओं को तोड़ती रही और यह ‘ऑपरेशन’ जारी रहा, तो एक दिन हमें भी ‘ऑपरेशन कमल’ करना पड़ेगा।” उन्होंने कहा कि देश में आज ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ नहीं बल्कि ‘वन पार्टी, नो इलेक्शन’ का एजेंडा चलाया जा रहा है, जो देश को अराजकता की ओर धकेल रहा है।
🤝 “मैं पद छोड़ने और किसी योग्य को प्रमुख बनाने के लिए तैयार हूं”
भाषण के दौरान उद्धव ठाकरे ने एक बेहद भावुक पासा फेंकते हुए कार्यकर्ताओं के सामने अपने इस्तीफे की पेशकश कर दी। उन्होंने कहा:
“अगर पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को कभी भी यह महसूस हो कि मैं शिवसेना प्रमुख के पद के लिए उपयुक्त नहीं हूं या इस पद के साथ न्याय नहीं कर पा रहा हूं, तो मैं आज ही यह जिम्मेदारी छोड़ने को तैयार हूं। मैं किसी भी योग्य शिवसैनिक को शिवसेना का प्रमुख बना दूंगा। मैं संघर्ष से पीछे हटने वाला इंसान नहीं हूं, लेकिन पद का मोह मुझे नहीं है।”
उद्धव के इस बयान के तुरंत बाद पांडाल में मौजूद हजारों शिवसैनिकों ने एक सुर में नारेबाजी शुरू कर दी और हाथ उठाकर उद्धव ठाकरे से ही पार्टी की कमान संभाले रखने की भावुक अपील की।
⚖️ कांग्रेस की तारीफ, लेकिन विलय की खबरों को बताया बकवास
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में कांग्रेस और बीजेपी की कार्यशैली की तुलना करते हुए एक बड़ा बयान दिया:
- बीजेपी से बेहतर कांग्रेस: उन्होंने स्वीकार किया कि शिवसेना की आधी से ज्यादा राजनीतिक जिंदगी कांग्रेस की कट्टर दुश्मनी में बीती है, लेकिन कांग्रेस ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद कभी ‘मातोश्री’ (ठाकरे परिवार का निवास स्थान) का अपमान नहीं किया। वे हिंदुत्व के नाम पर राजनीति करने वाली बीजेपी से बहुत बेहतर हैं।
- बीजेपी पर कटाक्ष: उद्धव ने दावा किया, “अगर शिवसेना ने शुरुआती दौर में बीजेपी का उंगली पकड़कर साथ नहीं दिया होता, तो बीजेपी बहुत पहले ही खत्म हो गई होती।”
- विलय से साफ इनकार: हालांकि, कांग्रेस की इस तारीफ के साथ ही उन्होंने शिवसेना (UBT) के कांग्रेस में विलय (Merger) की तमाम अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “शिवसेना का जन्म किसी दूसरी पार्टी में विलीन होने के लिए नहीं, बल्कि मराठी मानुष के अधिकारों और हिंदुत्व की रक्षा के लिए हुआ है। अब तो ऐसे हालात बन रहे हैं कि खुद बीजेपी को ही एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होना पड़ सकता है।”
🎯 बागी सांसद ओमराजे निंबालकर को दिया करारा जवाब
उद्धव ठाकरे ने उस्मानाबाद (धाराशिव) के सांसद ओमराजे निंबालकर के उस हालिया बयान पर भी पलटवार किया, जिसमें निंबालकर ने कहा था कि उद्धव खराब स्वास्थ्य के कारण चुनाव प्रचार के लिए बाहर नहीं निकलते।
उद्धव ने बेहद तीखे लहजे में पूछा, “अगर मैं प्रचार करने मैदान में नहीं उतरा था, तो फिर ओमराजे निंबालकर खुद चुनाव कैसे जीत गए? उन्हें जिताने के लिए हमारे गरीब किसानों और कार्यकर्ताओं ने पसीना बहाया था।” उन्होंने बागी सांसदों के सामने सवाल छोड़ा कि वे लोग विश्वासघात के इस पाप का प्रायश्चित कहां करेंगे और अपने माथे पर लगे गद्दारी के दाग को इतिहास में कैसे मिटा पाएंगे?










