‘बनारस की कदीमी अज़ादारी: गोविंदपूरा से पूरी रिवायत के साथ उठा पांचवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस; दालमंडी से फ़ातमान तक नम आंखों से गूंजे नौहे’
बनारस अज़ादारी: गोविंदपूरा छत्तातले से पूरी रिवायत के साथ उठा कदीमी पांचवीं मोहर्रम का ऐतिहासिक जुलूस। मुतवल्ली सैयद मुनाज़िर हुसैन 'मंजू' के ज़ेरे एहतमाम मजलिस के बाद गमगीन माहौल में रवाना हुआ मातम। दालमंडी से लेकर फ़ातमान तक गूंजी नौहाख्वानी, शहनाई पर पेश किया आंसुओं का नज़राना। पढ़ें PNN24 की विशेष सांस्कृतिक रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
वाराणसी (PNN24 News): मोहर्रम के पावन और गमगीन महीने के अवसर पर धर्म और विलायत की नगरी वाराणसी में पांचवीं मोहर्रम का पारंपरिक जुलूस पूरी अकीदत और अपनी पुरानी ऐतिहासिक परंपराओं के अनुसार निकाला गया। यह जुलूस ‘वक़्फ मस्जिद व इमामबाड़ा मौलाना मीर इमाम अली व मेहंदी बेगम’ (गोविंदपूरा, छत्तातले) से मुतवल्ली सैयद मुनाज़िर हुसैन ‘मंजू’ के ज़ेरे एहतमाम (कुशल प्रबंधन) में उठाया गया, जिसमें भारी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर करबला के शहीदों को याद किया।
📖 मजलिस में बयां हुआ करबला का मंजर
जुलूस की शुरुआत से पहले इमामबाड़े के प्रांगण में एक मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना ने करबला के मैदान में हक और इंसानियत के लिए शहीद हुए हज़रत इमाम हुसैन और उनके जानिसार साथियों की कुर्बानियों का भावपूर्ण जिक्र किया। मौलाना का बयान सुन वहां मौजूद सभी अज़ादारों की आंखें नम हो गईं।
🏴 ‘जब नहर पर आदा ने अलमदार को मारा’ — गमगीन माहौल में उठी सवारी
मजलिस की समाप्ति के बाद जैसे ही जुलूस रवाना हुआ, अज़ादारों का गम और गहरा हो गया। नजाकत अली खां और उनके साथियों ने बेहद गमगीन माहौल में सवारी शुरू की, जिसके बोल थे— “जब नहर पर आदा ने अलमदार को मारा”।
- पारंपरिक मार्ग: यह जुलूस अपने कदीमी रास्तों यानी गोविंदपूरा से शुरू होकर राजा दरवाजा, नारियल बाजार और चौक होते हुए दालमंडी स्थित हकीम साहब के अज़ाख़ाने पर पहुँचा।
- अंजुमन का मातम: यहाँ से ‘अंजुमन हैदरी चौक बनारस’ ने नौहाख्वानी और सीनाज़नी (मातम) की शुरुआत की। इस दौरान “मारा गया है तीर से बच्चा रबाब का” नौहा पढ़ा गया, जिस पर अज़ादारों ने भारी मातम किया। नौहाख्वानी में वफा बुतुराबी, शराफत हुसैन, लियाकत अली खां, साहब ज़ैदी, शफाअत हुसैन शोफी, राजा और शानू ने अपनी आवाज़ पेश की।
🎶 शहनाई पर आंसुओं का नज़राना और फ़ातमान में हाजिरी
दालमंडी से आगे बढ़ते हुए यह जुलूस खजूर वाली मस्जिद, नई सड़क, फाटक शेख सलीम, काली महल, पितरकुंडा और मुस्लिम स्कूल होते हुए लल्लापूरा स्थित ऐतिहासिक ‘फ़ातमान’ परिसर पहुंचा।
- शहनाई की गूंज: फ़ातमान पहुंचने पर उस्ताद फतेह अली खां और उनके साथियों ने शहनाई की धुन पर बेहद गमगीन धुनें बजाकर करबला के शहीदों को अपनी सुरीली अकीदत और आंसुओं का नज़राना पेश किया।
- जुलूस का समापन: फ़ातमान में ज़ियारत और हाजिरी के बाद जुलूस पुनः अपने पारंपरिक रास्ते से वापस मुस्लिम स्कूल, लाहंगपूरा, रांगे की ताज़िया, औरंगाबाद, नई सड़क कपड़ा मंडी और दालमंडी नया चौक होते हुए देर रात वापस अपने मूल गंतव्य ‘इमामबाड़े’ में पहुंचकर शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
सुरक्षा के लिहाज से स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल पूरे रूट पर मुस्तैद रहा ताकि जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से अपनी रिवायतों के साथ मुकम्मल हो सके।












