‘राम मंदिर विवाद: इस्तीफा स्वीकार होने के बाद चंपत राय ने तोड़ी चुप्पी; रामभक्तों को पत्र लिख बोले— “SIT की फाइनल रिपोर्ट आने दीजिए, क्रमानुसार दूंगा हर बात का जवाब!”‘
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड: इस्तीफा मंजूर होने के बाद चंपत राय ने तोड़ी चुप्पी, रामभक्तों के नाम जारी की 'पाती'। SIT की अंतिम रिपोर्ट के बाद हर सवाल का क्रमानुसार जवाब देने का किया विधिक दावा। आरएसएस (RSS) के पूर्व प्रचारक और आईएफएस (IFS) अधिकारी कृष्ण मोहन बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए अंतरिम महामंत्री। पढ़ें PNN24 की एक्सक्लूसिव विधिक रिपोर्ट।

शफी उस्मानी
अयोध्या/दिल्ली (PNN24 News): अयोध्या के भव्य राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित विधिक चोरी और वित्तीय गबन के आरोपों के बाद मचे देशव्यापी सियासी घमासान के बीच, राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कद्दावर नेता चंपत राय का पहला आधिकारिक बयान सामने आ गया है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ठीक एक दिन पहले, सोमवार 6 जुलाई 2026 को, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आपातकालीन विधिक बैठक में चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया।

📜 ‘धीरज धर्म मित्र अरु नारी…’— चौपाई से दी सफाई
चंपत राय ने अपने पत्र की शुरुआत में ही गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के अयोध्या कांड की एक बेहद प्रासंगिक चौपाई साझा की है:
“धीरज धर्म मित्र अरु नारी, आपद काल परिखिअहिं चारी।”
इसका मर्म समझाते हुए उन्होंने लिखा कि धैर्य, धर्म, मित्र और जीवनसाथी— इन चारों की वास्तविक परीक्षा केवल घोर संकट या विपत्ति के समय ही होती है। इसके बाद उन्होंने मुख्य शीर्षक दिया— “चंपत राय की पाती रामभक्तों के नाम।”
🔍 “SIT की अंतिम रिपोर्ट आने पर दूंगा क्रमानुसार जवाब”
अपने पत्र में चंपत राय ने जून २०२६ से शुरू हुए इस पूरे विधिक घटनाक्रम का जिक्र करते हुए लिखा:
“पिछले 7 जून 2026 से, श्री रामजन्मभूमि मन्दिर परिसर के दानपात्र की गणना के समय की गई चोरी के संबंध में अनेक प्रकार की चर्चाएं और विधिक अफवाहें चल रही हैं। मेरे व्यक्तिगत चरित्र और जीवन पर अनेकों ने अनर्गल आरोप लगाए हैं, जिसके कारण मैंने तात्कालिक रूप से मौन धारण कर लिया था। मन्दिर ट्रस्ट की 6 जुलाई को सम्पन्न हुई बैठक में एसआईटी (SIT) की प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। यह रिपोर्ट ‘परम गोपनीय’ श्रेणी की थी, लेकिन अब यह सार्वजनिक हो चुकी है।”
उन्होंने देश और दुनिया के तमाम रामभक्तों को आश्वस्त करते हुए विधिक रूप से कहा:
“मैं आप सभी को विश्वास दिलाता हूं कि जैसे ही एसआईटी (SIT) की अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट सामने आएगी, विरोधियों द्वारा फैलाए जा रहे सभी भ्रामक बिंदुओं पर मैं अपना उत्तर क्रमानुसार (Point by Point) दूंगा। उस दिन पूरा विधिक सत्य देश के सामने आ जाएगा। अक्तूबर 1991 से संगठन (RSS/VHP) द्वारा मुझे अयोध्या भेजा गया था। मेरा 45 वर्षों का प्रचारक जीवन सबके सामने एक खुली पुस्तक के समान पवित्र है।”
🚪 ट्रस्ट ने स्वीकार किया अनिल मिश्रा और चंपत राय का इस्तीफा
इससे पूर्व, सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति में एक विधिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने आधिकारिक रूप से मीडिया से बात करते हुए पुष्टि की कि चंपत राय और अनिल मिश्रा द्वारा पिछले महीने (26-27 जून) दिए गए इस्तीफों को विधिक रूप से मंजूर कर लिया गया है。 गोविंद देव गिरी ने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट के संविधान के नियमों के अनुसार, पद से त्यागपत्र देते ही उसे स्वतः स्वीकृत माना जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि आगामी 22 जुलाई 2026 को ट्रस्ट की दोबारा एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें खास प्रशासनिक अधिकारियों की स्थाई नियुक्ति के लिए बनी विधिक समिति अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, और तब तक एसआईटी (SIT) की अंतिम विधिक जांच रिपोर्ट आने की भी पूरी उम्मीद है।
👔 कौन हैं कृष्ण मोहन? जो बने राम मंदिर ट्रस्ट के नए अंतरिम महामंत्री
चंपत राय के हटने के बाद राम मंदिर के प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का नया अंतरिम (Interim) महामंत्री नियुक्त किया गया है। आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ विधिक व प्रशासनिक मुख्य बातें:
- दलित समुदाय से प्रतिनिधित्व: उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के मूल निवासी कृष्ण मोहन दलित समुदाय से आते हैं。 बीते साल सितंबर में ट्रस्ट के दलित सदस्य कामेश्वर चौपाल (बिहार निवासी) के आकस्मिक निधन के बाद कृष्ण मोहन को ट्रस्टी के रूप में नामित किया गया था।
- पूर्व IFS अधिकारी व वैज्ञानिक: कृष्ण मोहन की शैक्षणिक और प्रशासनिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत है। लखनऊ विश्वविद्यालय से जियोलॉजी (भूविज्ञान) में एमएससी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक ‘परमाणु ऊर्जा विभाग’ में बतौर वैज्ञानिक देश की सेवा की। इसके बाद साल 1978 में वे भारतीय वन सेवा (IFS) में शामिल हुए और महाराष्ट्र कैडर के अंतर्गत विभिन्न प्रशासनिक पदों पर रहते हुए 2012 में एडिशनल प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर के प्रतिष्ठित पद से सेवानिवृत्त हुए。
- RSS में लंबा अनुभव: वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक अत्यंत निष्ठावान पदाधिकारी रहे हैं。 उन्होंने संघ के भीतर नगर संघचालक, जिला संघचालक से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश (अवध प्रांत) के ‘क्षेत्र संघचालक’ जैसे सर्वोच्च दायित्वों का विधिक निर्वहन किया है।
- प्राण प्रतिष्ठा के यजमान: जनवरी 2024 में जब अयोध्या राम मंदिर का ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा समारोह आयोजित हुआ था, तब कृष्ण मोहन अपनी धर्मपत्नी के साथ मुख्य यजमान दंपतियों की विधिक सूची में शामिल थे।
ट्रस्ट के अंतरिम महामंत्री का पदभार संभालते हुए कृष्ण मोहन ने कहा कि चंपत राय जी के माध्यम से ही उन्हें ट्रस्टी बनने की अप्रत्याशित सूचना मिली थी, और यह सब प्रभु श्री राम की विधिक इच्छा का परिणाम है, जिसे वे पूरी सत्यनिष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे।










