‘अडानी केस में अमेरिकी संसद से अदालत तक हड़कंप; सीनेटरों ने पूछा— “क्या 10 अरब डॉलर के निवेश के बदले मिल रही है माफी?”; संघीय जज ने मुकदमा खारिज करने से किया इनकार’

अडानी मामले में अमेरिकी संसद से अदालत तक हड़कंप: सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और रिचर्ड ब्लूमेंथल का बड़ा आरोप— 'क्या 10 अरब डॉलर के निवेश के बदले अडानी को दी जा रही है आपराधिक केस से राहत?' संघीय जज निकोलस गराउफिस ने मुकदमा तुरंत वापस लेने से किया इनकार, 13 जुलाई तक मांगा विस्तृत जवाब। पढ़ें PNN24 की खोजी रिपोर्ट।

महविश कुरैशी

PNN24 News: भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा दर्ज आपराधिक मुकदमे को वापस लेने (Withdrawal of Prosecution) की अचानक हुई कोशिशों पर वैश्विक स्तर पर सवाल गहरे हो गए हैं। यह मामला अब केवल अदालती कमरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की दहलीज तक जा पहुंचा है।

अमेरिकी संघीय अदालत द्वारा न्याय विभाग से इस अप्रत्याशित फैसले का विधिक आधार मांगे जाने से ठीक दो हफ्ते पहले, डेमोक्रेटिक पार्टी के दो बेहद कद्दावर और वरिष्ठ सीनेटरों ने एक पत्र लिखकर इस पूरे घटनाक्रम को ट्रंप प्रशासन की ‘क्रूर राजनैतिक साठगांठ’ और भ्रष्टाचार का नमूना बताया है।

🏛️ जज निकोलस गराउफिस का बड़ा झटका; 13 जुलाई की डेडलाइन

न्यूयॉर्क की संघीय अदालत के जिला न्यायाधीश निकोलस गराउफिस ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को अमेरिकी न्याय विभाग की उस याचिका को तुरंत मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया, जिसमें गौतम अडानी और सात अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ दायर किए गए मुख्य आरोपपत्र (Chargetsheet) को पूरी तरह खारिज करने की मांग की गई थी।

  • अदालत का सख्त रुख: न्यायाधीश ने न्याय विभाग को कड़ी हिदायत देते हुए 13 जुलाई तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर किन ठोस और विधिक कारणों के आधार पर अचानक इतने गंभीर आपराधिक मामले को वापस लिया जा रहा है, और सरकार इसके समर्थन में पुख्ता तथ्य अदालत के पटल पर रखे।

💼 ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ का सनसनीखेज दावा: 10 अरब डॉलर का “सौदा”?

इस बीच, अमेरिकी सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन और रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश को 11 जून को एक कड़ा पत्र भेजा था, जो अब सार्वजनिक हो चुका है। यह पत्र ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) की उस खोजी रिपोर्ट के बाद लिखा गया था, जिसने अमेरिकी कॉर्पोरेट जगत में तहलका मचा दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक:

  • वकील और ट्रंप कनेक्शन: अप्रैल २०२६ में न्याय विभाग के शीर्ष अधिकारियों के साथ हुई एक गुप्त बैठक के दौरान गौतम अडानी के वकील रॉबर्ट जियुफ्रा जूनियर (जो कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के भी निजी वकील हैं) ने एक कथित प्रस्ताव रखा था।
  • निवेश की शर्त: प्रस्ताव में कहा गया था कि यदि अमेरिकी सरकार गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे सभी आपराधिक मुकदमों को वापस ले लेती है, तो अडानी समूह अमेरिकी धरती पर 10 अरब डॉलर (लगभग 84,000 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम निवेश करने के लिए तैयार है।

🚨 “रिश्वत देकर बच निकलने का संदेश जाएगा”— सीनेटरों की चेतावनी

सीनेटर वॉरेन और ब्लूमेंथल ने अपने पत्र में न्याय विभाग से सीधे और तीखे सवाल पूछे हैं:

  1. क्या गौतम अडानी या उनके प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से आपराधिक केस बंद करने के बदले 10 अरब डॉलर के निवेश की कोई ‘डील’ (Quid Pro Quo) ऑफर की थी?
  2. इस फैसले को हरी झंडी देने में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस या कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश की क्या भूमिका रही है? क्या विभाग के भीतर किसी विधिक अधिकारी ने इस नरमी का विरोध किया था?

सीनेटरों ने चेतावनी देते हुए कहा:

“अगर वित्तीय ताकत और राजनैतिक रसूख के दम पर किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के मालिक को आपराधिक अभियोजन से इस तरह राहत दी जाती है, तो पूरी दुनिया में यह गलत संदेश जाएगा कि अमेरिका में कानून को रिश्वत देकर खरीदा जा सकता है। यह न्याय व्यवस्था के मुंह पर तमाचा होगा।”

⚠️ क्या है मूल मामला? (Adani US Legal Troubles)

गौतम अडानी की अमेरिकी कानून के साथ मुश्किलें तीन अलग-अलग मोर्चों पर खुली हुई हैं:

  • आपराधिक केस (DOJ): नवंबर 2024 में दर्ज मामले के अनुसार, भारत में सौर ऊर्जा (Solar Power) की सरकारी परियोजनाओं के ठेके हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 25 करोड़ डॉलर (लगभग ₹2,100 करोड़) की रिश्वत देने की साजिश रची गई थी। इसमें अमेरिकी निवेशकों के साथ वायर फ्रॉड (इलेक्ट्रॉनिक धोखाधड़ी) और विदेशी भ्रष्ट आचरण कानून (FCPA) के उल्लंघन के संगीन आरोप शामिल हैं।
  • दीवानी केस (SEC): अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने बॉन्ड जारी करते समय निवेशकों को गुमराह करने का दीवानी दावा ठोका था। हालांकि, इस मामले में हाल ही में एक समझौता हुआ है, जिसके तहत बिना आरोपों को स्वीकार या इनकार किए गौतम अडानी 60 लाख डॉलर और सागर अडानी 1.2 करोड़ डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमत हुए हैं।
  • ईरान प्रतिबंध उल्लंघन (Treasury): अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरानी मूल की एलपीजी (LPG) गैस के आयात से जुड़े प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले में भी अडानी एंटरप्राइजेज के साथ 27.5 करोड़ डॉलर का एक बड़ा वित्तीय समझौता (Settlement) किया है।

सीनेटरों का कहना है कि इन तमाम समझौतों और मुकदमों को वापस लेने की टाइमलाइन को यदि एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो यह साफ होता है कि वर्तमान अमेरिकी प्रशासन कानून को निष्पक्षता से लागू करने के बजाय अपने व्यक्तिगत और राजनैतिक हितों को साधने में लगा हुआ है। अब पूरी दुनिया की नजरें 13 जुलाई को अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा अदालत में दिए जाने वाले आधिकारिक जवाब पर टिकी हैं।

हमारी निष्पक्ष पत्रकारिता को कॉर्पोरेट के दबाव से मुक्त रखने के लिए आप आर्थिक सहयोग यदि करना चाहते हैं तो यहां क्लिक करें


Welcome to the emerging digital Banaras First : Omni Chanel-E Commerce Sale पापा हैं तो होइए जायेगा..

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *